शिलांग, 30 सितंबर (आईएएनएस)। मेघालय में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 90 प्रतिशत से अधिक सुनवाई पूरी हो चुकी है। अधिकारियों ने बुधवार को जानकारी दी कि आगे की कार्रवाई में बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) मतदाता सूची में विसंगतियों और चुनावी अभिलेखों में कमियों से संबंधित मामलों में दस्तावेज एकत्र करने के लिए मतदाताओं के घर जाएंगे।
मेघालय के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ), बीडीआर तिवारी ने 29 सितंबर को उपायुक्तों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और अन्य चुनाव अधिकारियों के साथ एक वर्चुअल बैठक के दौरान एसआईआर 2026 की प्रगति की समीक्षा की।
सीईओ कार्यालय ने जानकारी दी कि मेघालय में मसौदा मतदाता सूची में 21,69,243 मतदाता दर्ज हैं। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जारी किए गए 6,51,735 नोटिसों में से 6,51,066 नोटिस वितरित किए जा चुके हैं, जबकि 619 नोटिसों को अभी वितरित किया जाना बाकी है। अब तक 5,90,784 सुनवाईयां पूरी हो चुकी हैं, जो जारी किए गए नोटिसों का 90.65 प्रतिशत है।
निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच के बाद, 910 मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए अयोग्य पाया गया है, जबकि 19,07,182 मतदाताओं को अंतिम प्रकाशन के लिए बरकरार रखा गया है।
चुनाव अधिकारियों ने 23,259 आवेदनों का डिजिटलीकरण भी किया है, जिनमें नए नामांकन के लिए 12,624 फॉर्म 6 आवेदन, आपत्तियों या नाम हटाने से संबंधित 1,616 फॉर्म 7 आवेदन और स्थानांतरण व सुधार से संबंधित 9,019 फॉर्म 8 आवेदन शामिल हैं।
अधिकारियों ने कहा कि अगले चरण में राज्य भर में पहचाने गए 2,22,786 ‘नो मैपिंग’ मामलों और 4,28,949 ‘मैपिंग विसंगति’ मामलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के नवीनतम निर्देशों के तहत, बीएलओ इन श्रेणियों में आने वाले मतदाताओं के घरों का दौरा करेंगे, ताकि आवश्यक दस्तावेज एकत्र किए जा सकें और उन्हें ईसीआईएनईटी के माध्यम से अपलोड किया जा सके।
ऐसे मतदाताओं को आम तौर पर ईआरओ या एईआरओ कार्यालयों में जाने की जरूरत नहीं होगी। सुनवाई सिर्फ निर्धारित असाधारण मामलों में ही होगी, जिसका फैसला ईआरओ करेगा और कोशिश यही होगी कि सुनवाई ऑनलाइन हो। मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से मतदान करने के लिए अधिकृत भी कर सकता है।
अधिकारियों को वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, श्रमिकों, बेघर लोगों और अन्य कमजोर समूहों के लिए समर्पित सहायता डेस्क और विशेष शिविर स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। सीईओ के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि नोटिस प्राप्त होने या ‘नो मैपिंग’ या ‘मैपिंग विसंगति’ के तहत वर्गीकृत होने से मतदाता का नाम स्वतः ही नहीं हटाया जाएगा।
फिलहाल, 18 सितंबर को दावों और आपत्तियों की अवधि समाप्त होने के साथ ही, पुनरीक्षण प्रक्रिया अपने अंतिम वैधानिक चरणों में प्रवेश कर चुकी है।
सीईओ कार्यालय ने पात्र नागरिकों से आग्रह किया कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने पर वे अपने नामों का सत्यापन करें। साथ ही, सीईओ कार्यालय ने दोहराया कि कोई भी योग्य वोटर छूट न जाए।
–आईएएनएस
डीसीएच/
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