केरल विधानसभा में पीएम श्री योजना पर यूडीएफ-एलडीएफ में तीखी नोकझोंक, विपक्ष का वॉकआउट

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तिरुवनंतपुरम, 24 जून (आईएएनएस)। केरल विधानसभा में बुधवार को केंद्र प्रायोजित पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना को लेकर सत्तारूढ़ यूडीएफ (यूडीएफ) और विपक्षी एलडीएफ (एलडीएफ) के बीच तीखी बहस देखने को मिली। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर राज्य के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। विवाद इतना बढ़ गया कि अंततः विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। विवाद की शुरुआत एलडीएफ विधायक पी. प्रसाद द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव से हुई, जिसमें सरकार के पीएम श्री योजना पर रुख को लेकर चर्चा की मांग की गई थी। इस पर शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने सरकार…

तिरुवनंतपुरम, 24 जून (आईएएनएस)। केरल विधानसभा में बुधवार को केंद्र प्रायोजित पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना को लेकर सत्तारूढ़ यूडीएफ (यूडीएफ) और विपक्षी एलडीएफ (एलडीएफ) के बीच तीखी बहस देखने को मिली। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर राज्य के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। विवाद इतना बढ़ गया कि अंततः विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

विवाद की शुरुआत एलडीएफ विधायक पी. प्रसाद द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव से हुई, जिसमें सरकार के पीएम श्री योजना पर रुख को लेकर चर्चा की मांग की गई थी।

इस पर शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने सरकार का बचाव करते हुए पिछली एलडीएफ सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने सदन में दस्तावेज पेश करते हुए दावा किया कि वर्ष 2024 में तत्कालीन सामान्य शिक्षा सचिव ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर केरल की योजना लागू करने की इच्छा जताई थी।

मंत्री ने आरोप लगाया कि 16 अक्टूबर 2025 को एलडीएफ सरकार ने केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें ऐसी शर्त स्वीकार की गई थी कि समझौते से हटने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास होगा।

शम्सुद्दीन ने कहा, “पिछली सरकार ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करके केरल के हितों से समझौता किया। वर्तमान सरकार ने न तो कोई नया समझौता किया है और न ही राज्य के अधिकारों से समझौता किया है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूडीएफ सरकार द्वारा गठित कैबिनेट उपसमिति का उद्देश्य योजना को लागू करना नहीं है। मंत्री के अनुसार, इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार द्वारा केंद्र को भेजे गए पत्र में समझौते को रद्द करने की मांग नहीं की गई थी, बल्कि केवल इसके क्रियान्वयन को टालने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि एलडीएफ अपनी ही असहज स्थिति को छिपाने के लिए विवाद खड़ा कर रही है।

वहीं, विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले यूडीएफ ने पीएम श्री योजना का विरोध किया था, लेकिन अब उसका रुख बदल गया है।

विजयन ने कहा, “यूडीएफ ने वादा किया था कि वह इस योजना को बाहर का रास्ता दिखाएगी। अब वह ऐसा करने को तैयार क्यों नहीं है?”

उन्होंने दावा किया कि एलडीएफ सरकार ने समझौते को प्रभावी रूप से ठंडे बस्ते में डाल दिया था और इसके क्रियान्वयन की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। उनके अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर होने के आठ महीने बाद भी केरल में योजना लागू नहीं हुई और राज्य ने योजना में शामिल किए जाने वाले स्कूलों की सूची तक केंद्र को नहीं भेजी।

विपक्ष के नेता ने सरकार पर “संघ परिवार के एजेंडे के आगे झुकने” का आरोप लगाते हुए मांग की कि सरकार स्पष्ट रूप से आश्वासन दे कि राज्य में पीएम श्री योजना लागू नहीं की जाएगी।

हालांकि, शिक्षा मंत्री के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव को अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके विरोध में एलडीएफ सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिसके साथ ही इस मुद्दे पर हुई गरमागरम बहस समाप्त हुई।

–आईएएनएस

डीएससी

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