वन्नियार संगम की स्थापना ने तमिलनाडु के सामाजिक न्याय के इतिहास में एक खास जगह बनाई: अंबुमणि रामदास

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चेन्नई, 20 जुलाई (आईएएनएस)। पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने रविवार को वन्नियार संगम के स्थापना दिवस के मौके पर तमिलनाडु के सभी समुदायों के लिए व्यापक सामाजिक न्याय हासिल करने के प्रति अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने संगठन के गठन को राज्य के सामाजिक न्याय आंदोलन में एक अहम मोड़ बताया और लोगों से समाज के हर वर्ग के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को फिर से दोहराने का आह्वान किया। इस मौके पर जारी एक बयान में अंबुमणि ने वन्नियार समुदाय के सदस्यों, कार्यकर्ताओं और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने वाले सभी…

चेन्नई, 20 जुलाई (आईएएनएस)। पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने रविवार को वन्नियार संगम के स्थापना दिवस के मौके पर तमिलनाडु के सभी समुदायों के लिए व्यापक सामाजिक न्याय हासिल करने के प्रति अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता को दोहराया।

उन्होंने संगठन के गठन को राज्य के सामाजिक न्याय आंदोलन में एक अहम मोड़ बताया और लोगों से समाज के हर वर्ग के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को फिर से दोहराने का आह्वान किया।

इस मौके पर जारी एक बयान में अंबुमणि ने वन्नियार समुदाय के सदस्यों, कार्यकर्ताओं और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने वाले सभी लोगों को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि पीएमके के संस्थापक डॉ. एस. रामदास द्वारा शुरू किए गए वन्नियार संगम की स्थापना का मकसद पूरे तमिलनाडु में पिछड़े वर्गों, अति पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना था।

अंबुमणि के अनुसार, इस संगठन ने राज्य में समान प्रतिनिधित्व और आरक्षण नीतियों पर बहस को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि जिस दिन वन्नियार संगम की स्थापना हुई, उसने तमिलनाडु के सामाजिक न्याय के इतिहास में एक खास जगह बनाई, क्योंकि इसने सभी समुदायों के लिए निष्पक्ष अवसर सुनिश्चित करने के मकसद से डेटा-आधारित नीतियों की जरूरत पर फिर से ध्यान आकर्षित किया।

उन्होंने याद दिलाया कि डॉ. रामदास ने तमिलनाडु में जाति-आधारित जनगणना की वकालत की थी और हर समुदाय की आबादी के आधार पर शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग की थी।

उस समय उठाई गई मांगों में वन्नियार समुदाय के लिए आरक्षण के बेहतर लाभ शामिल थे। जिसे उन्होंने राज्य के सबसे बड़े समुदायों में से एक बताया, साथ ही अनुसूचित जातियों के लिए उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण बढ़ाने की मांग भी शामिल थी।

उन्होंने कहा कि ये प्रस्ताव समान प्रतिनिधित्व के लिए आंदोलन के अभियान की नींव बने।

अंबुमणि ने कहा कि जाति जनगणना की मांग अब एक अहम चरण में पहुंच गई है, क्योंकि केंद्र और राज्य दोनों सरकारें जाति-आधारित जनगणना करने की तैयारी कर रही हैं।

उन्होंने इस घटनाक्रम को सामाजिक न्याय के लिए आंदोलन के लंबे अभियान में पहला बड़ा मील का पत्थर बताया।

पीएमके नेता ने कहा कि अंतिम मकसद निष्पक्ष प्रतिनिधित्व और शिक्षा व रोजगार के अवसरों तक समान पहुंच के जरिए तमिलनाडु में हर समुदाय के लिए पूर्ण सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है।

समर्थकों और जनता से इस मकसद के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान करते हुए, अंबुमणि ने लोगों से वन्नियार संगम के स्थापना दिवस के मौके पर एक ऐसे समावेशी समाज के लिए काम करने के अपने संकल्प को फिर से दोहराने का आग्रह किया, जहां हर समुदाय को उसकी जरूरतों और आकांक्षाओं के अनुपात में न्याय मिले।

–आईएएनएस

डीकेएम/पीएम

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