वाराणसी, 2 नवंबर (आईएएनएस)। विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के निदेशक प्रोफेसर जेफरी डी. सैक्स ने सोमवार को भारत और वैश्विक स्तर पर सतत विकास के क्षेत्र में अदाणी समूह तथा उसकी सामाजिक विकास संस्था अदाणी फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
वाराणसी में आयोजित “आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान” विश्व संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रोफेसर सैक्स ने अदाणी समूह को भारत में बदलाव, प्रगति और बुनियादी ढांचा विकास के प्रमुख प्रेरक बलों में से एक बताया।
उन्होंने कहा, “देश की इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित विकास यात्रा में समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आर्थिक प्रगति को गति देने में उसका योगदान उल्लेखनीय है।”
अपने उद्घाटन संबोधन में सैक्स ने कहा कि बड़े पारिवारिक उद्योग समूह केवल कारोबारी संस्थाएं नहीं होते, बल्कि वे अपने साथ परिवार के मूल्यों, विरासत और समाज के प्रति जिम्मेदारी को भी लेकर चलते हैं।
अदाणी समूह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे उद्यमों को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि वे समाज और उन समुदायों को क्या वापस दे रहे हैं, जिनके बीच वे काम करते हैं।
सामाजिक उत्तरदायित्व और कॉरपोरेट प्रशासन के संदर्भ में सैक्स ने यूनिलीवर के पूर्व सीईओ पॉल पोलमैन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पोलमैन ने यूनिलीवर को सामाजिक रूप से जिम्मेदार कंपनी बनाने का प्रयास किया था, लेकिन उन्हें उन निवेशकों और शेयरधारकों के विरोध का सामना करना पड़ा जो केवल वित्तीय लाभ को प्राथमिकता देते थे।
प्रोफेसर सैक्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से विस्तार पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक अवसरों की खोज के साथ-साथ इसके संभावित जोखिमों पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ओर उसके सीईओ डारियो अमोदेई एआई तकनीक के संभावित गंभीर खतरों को लेकर चेतावनी देते हैं, वहीं दूसरी ओर कंपनी बड़े प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की दिशा में आगे बढ़ रही है।
सैक्स ने आगे कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कारोबारी महत्वाकांक्षाओं से अधिक महत्वपूर्ण तकनीक से जुड़े जोखिमों और उनके सामाजिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार करना है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आज दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनमें आर्थिक विकास, सामाजिक उत्तरदायित्व और तकनीकी नवाचार के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सतत विकास तभी संभव है जब उद्योग, सरकारें और समाज मिलकर दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता दें।
–आईएएनएस
डीबीपी
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