मुंबई, 6 नवंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ तो वह देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकाल रही है और दूसरी तरफ ‘स्थानीय निकायों पर कब्जा करने के लिए लोकतांत्रिक जनादेश को दरकिनार’ कर रही है।
सत्ताधारी दल के विपक्ष के खिलाफ सड़कों पर उतरने के विरोधाभास पर निशाना साधते हुए ठाकरे ने पार्टी के इरादों पर सवाल उठाए।
उन्होंने कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (गोकुल डेयरी) के चुनावों में पार्टी की हालिया चालों का जिक्र किया।
भाजपा की रणनीति का मजाक उड़ाते हुए ठाकरे ने इस विडंबना की ओर इशारा किया कि केंद्र से लेकर स्थानीय स्तर तक पूर्ण सत्ता रखने वाली पार्टी, ‘संविधान बचाने’ के नाम पर विरोध प्रदर्शन कर रही है।
उन्होंने कहा, “भारतीय जनता पार्टी सचमुच एक अजीब पार्टी है। सत्ता में पूरी तरह से काबिज होने के बावजूद ‘लोकतंत्र बचाने’ के लिए मार्च निकाल रही है। शायद दुनिया में यह इकलौता ऐसा उदाहरण होगा, जहां सत्ताधारी पार्टी ही विपक्ष के खिलाफ मार्च निकाल रही है।”
ठाकरे ने ‘लोकतंत्र बचाने’ का दावा करने वाली सत्ताधारी पार्टी की तुलना ‘मुर्गियों को बचाने के लिए अभियान चलाने वाले केएफसी के मशहूर लोगो (मस्कट)’ से की। उन्होंने आरोप लगाया कि एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बावजूद भाजपा अभी भी विपक्ष वाली मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाई है।
भाजपा के ‘दोहरे मापदंडों’ को उजागर करने के लिए ठाकरे ने गोकुल डेयरी बोर्ड चुनावों में हाल ही में हुए घटनाक्रम का जिक्र किया। इन चुनावों में कांग्रेस नेता सत्यजीत पाटिल के नेतृत्व वाले विपक्षी पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा समर्थित पैनल को 12 सीटें मिलीं। हालांकि, हार के बाद राज्य सरकार ने वोटिंग अधिकारों वाले पांच सरकारी निदेशकों को नामित करने का कदम उठाया।
ठाकरे ने कहा कि इस कदम की काफी आलोचना हुई, क्योंकि इसे बहुमत को जबरन पलटने की कोशिश के रूप में देखा गया।
उन्होंने सवाल किया, “अगर सच में आपके अंदर लोकतंत्र की जड़ों को बचाने की इतनी तीव्र इच्छा है, तो गोकुल डेयरी के मामले में, जहां भाजपा पैनल के 12 सदस्यों के मुकाबले सत्यजीत पाटिल के पैनल के 13 सदस्य चुने गए, आपने तुरंत सरकार की ओर से 5 निदेशक क्यों नियुक्त किए और उन्हें वोटिंग अधिकार क्यों दे दिए? आखिर आप इससे क्या साबित करना चाहते हैं?”
ठाकरे ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक मतदान के जरिए ‘गोकुल’ पर अपना नियंत्रण हासिल नहीं कर सकी, इसलिए उसने अपने सिद्धांतों को ताक पर रखकर प्रशासनिक दखलअंदाजी का सहारा लिया। इससे सड़कों पर किए जाने वाले उनके विरोध प्रदर्शनों का पाखंड सामने आ गया है।
उन्होंने कहा, “इस समय महाराष्ट्र में पानी का भारी संकट है और ठीक उसी समय भाजपा में ‘सामान्य समझ’ का भी भारी अकाल पड़ा हुआ है। यह हैरानी की बात है कि ऐसा कैसे हो सकता है।”
ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा अक्सर अपनी प्रशासनिक विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए विरोध प्रदर्शनों का नाटक करती है। जब भाजपा के कार्यकाल में सुरक्षा में लापरवाही होती है, तो वह ‘देश को आतंकवाद से बचाने’ के लिए मार्च निकालती है। जब वह खुद आर्थिक विकास को अस्थिर कर देती है, तो ‘अर्थव्यवस्था को बचाने’ के लिए मार्च निकालने लगती है।
ठाकरे ने सत्ताधारी पार्टी को सलाह दी कि वह चुनावी हार को शालीनता से स्वीकार करे और याद दिलाया कि राजनीति में हालात कभी भी बदल सकते हैं।
उन्होंने कहा, “भाजपा को अब ‘हम पर जुल्म हो रहा है’ हमदर्दी कार्ड वाला खेल बंद करना चाहिए। जिस तरीके से उन्होंने बहुमत हासिल किया था, उसे सभी विपक्षी दलों ने 12 साल तक झेला है। अगर अब देश की जनता विपक्षी दलों की ओर झुक रही है, तो भाजपा को भी इसे बर्दाश्त करना सीखना चाहिए।”
–आईएएनएस
ओपी/एबीएम
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