राजस्थान पुलिस का ई-जीरो एफआईआर सिस्टम असरदार, 18 घंटे में दर्ज हुईं 7 शिकायतें

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जयपुर, 24 जुलाई (आईएएनएस)। साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड के लिए राजस्थान पुलिस के नए शुरू किए गए ई-जीरो एफआईआर सिस्टम के तुरंत अच्छे नतीजे दिखे हैं। इसे लागू करने के पहले 18 घंटों में ही सात ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गईं। डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में शुरू की गई इस पहल से 1 लाख रुपए या उससे ज्‍यादा के साइबर फ्रॉड मामलों में ई-जीरो एफआईआर अपने आप दर्ज हो जाती हैं, जिससे पुलिस बिना देरी के कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, नए सिस्टम के तहत अब तक 460 ई-जीरो एफआईआर दर्ज…

जयपुर, 24 जुलाई (आईएएनएस)। साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड के लिए राजस्थान पुलिस के नए शुरू किए गए ई-जीरो एफआईआर सिस्टम के तुरंत अच्छे नतीजे दिखे हैं। इसे लागू करने के पहले 18 घंटों में ही सात ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गईं।

डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में शुरू की गई इस पहल से 1 लाख रुपए या उससे ज्‍यादा के साइबर फ्रॉड मामलों में ई-जीरो एफआईआर अपने आप दर्ज हो जाती हैं, जिससे पुलिस बिना देरी के कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकती है।

अधिकारियों के मुताबिक, नए सिस्टम के तहत अब तक 460 ई-जीरो एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जो साइबरक्राइम के पीड़ितों को तेजी से राहत दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

एडिशनल डायरेक्टर जनरल (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने कहा कि नए सिस्टम के लागू होने के बाद साइबर क्राइम के खिलाफ राजस्थान पुलिस के अभियान को तेजी मिली है।

इस इंटीग्रेटेड सिस्टम के तहत, ‘1930’ साइबर हेल्पलाइन के जरिए दर्ज शिकायतें अपने आप इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) से जुड़ जाती हैं। इससे शिकायतें तुरंत संबंधित पुलिस स्टेशन तक पहुंच जाती हैं ताकि उन पर फौरन कार्रवाई हो सके।

अधिकारियों ने कहा कि नई प्रक्रिया शिकायतों को सीधे सही जांच एजेंसी को भेजकर अधिकार क्षेत्र से जुड़ी देरी को कम करती है, जिससे रिस्पॉन्स टाइम में काफी कमी आती है।

यह सिस्टम पुलिस को संदिग्ध बैंक अकाउंट्स को फ्रीज करने और धोखाधड़ी वाले ट्रांजेक्शन का पता लगाने जैसे कदम तेजी से उठाने में भी मदद करता है, जिससे साइबर फ्रॉड में खोए पैसे को वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है।

राजस्थान पुलिस ने लोगों से अपील करते हुए साइबर फ्रॉड के पीड़ितों से कहा कि जैसे ही उन्हें किसी धोखाधड़ी वाले ट्रांजेक्शन का पता चले, वे तुरंत ‘1930’ साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें और शिकायत दर्ज कराएं।

अधिकारियों ने कहा, “शिकायत जितनी जल्दी दर्ज कराई जाएगी, मनी ट्रेल को फ्रीज करने और धोखाधड़ी वाली रकम को वापस पाने की संभावना उतनी ही ज्‍यादा होगी।”

राजस्थान पुलिस ने गुरुवार को 1 लाख रुपए या उससे ज्‍यादा के साइबर फ्रॉड मामलों के लिए ई-जीरो एफआईआर की ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू की।

डीजीपी ने सभी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसपी) और पुलिस कमिश्नरों को विस्तृत गाइडलाइंस जारी की हैं और उन्हें नई प्रक्रिया को तुरंत लागू करने का निर्देश दिया है।

यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद लिया गया है। इसका मकसद कानूनी कार्रवाई में तेजी लाना, धोखाधड़ी से हड़पे गए पैसों को तुरंत फ्रीज करना और साइबर अपराधियों की तेजी से जांच और गिरफ्तारी सुनिश्चित करना है।

साइबर क्राइम के एडिशनल डायरेक्टर जनरल वीके सिंह ने बताया कि राजस्थान के पुराने ई-एफआईआर सिस्टम में सिर्फ 5 लाख रुपए या उससे ज्‍यादा की साइबर फाइनेंशियल धोखाधड़ी के मामले ही शामिल थे।

अब इस सीमा को घटाकर 1 लाख रुपए कर दिया गया है, जिससे और भी ज्यादा पीड़ितों को तुरंत कानूनी सुरक्षा मिल सकेगी।

–आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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