नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। राबर्ट वाड्रा ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी वह याचिका वापस ले ली, जिसमें उन्होंने एक निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत पर संज्ञान लिया था। यह मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 2008 की एक भूमि सौदे से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले से संबंधित है।
एकल न्यायाधीश पीठ के न्यायमूर्ति मनोज जैन ने यह याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी, जब राबर्ट वाड्रा के वकील ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि याचिकाकर्ता “वर्तमान याचिका को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं रखते” और इसे बिना शर्त वापस लेना चाहते हैं।
न्यायमूर्ति जैन ने कहा, “प्रारंभ में ही, याचिकाकर्ता के वकील प्रतीक के. चड्ढा ने बताया कि याचिकाकर्ता याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और इसे वापस लेना चाहते हैं,” और उन्होंने मामले का निपटारा करते हुए सभी पक्षों के अधिकार और दलीलों को खुला रखा।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाड्रा की याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि इसमें “गलत और भ्रामक कानूनी दावे” किए गए हैं।
पिछली सुनवाई में ईडी के वकील ज़ोहेब हुसैन ने याचिका की स्वीकार्यता पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया था कि इसमें “कानून को लेकर पूरी तरह गलत बयान” दिए गए हैं।
पिछले सप्ताह वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, जो वाड्रा की ओर से पेश हुए थे, ने दलील दी थी कि ईडी के पास पीएमएलए के तहत कार्रवाई शुरू करने का अधिकार नहीं है क्योंकि आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कथित अपराध उस समय “अनुसूचित अपराध” नहीं थे, जब 2008–2012 के बीच लेन-देन हुआ था।
ईडी ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि यह कानूनी रूप से गलत है और आरोप लगाया कि याचिका में “कानून को लेकर पूरी तरह गलत बयान” दिए गए हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद तत्काल राहत देने से इनकार किया था और मामले को आगे की सुनवाई के लिए 18 मई तक स्थगित कर दिया था।
इस बीच, राउज एवेन्यू की विशेष पीएमएलए अदालत ने वाड्रा को जमानत दे दी है, जब वे ईडी के समन के अनुपालन में अदालत में पेश हुए थे।
विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोत्रा ने 50,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानतदार पर जमानत दी और मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई के लिए तय की।
यह मामला हरियाणा के शिकोहपुर गांव में 3.53 एकड़ जमीन की कथित लेन-देन में अनियमितताओं से जुड़ा है। ईडी के अनुसार, वाड्रा की कंपनी स्काइलाइट हास्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने फरवरी 2008 में ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड से 7.50 करोड़ रुपये में जमीन खरीदी थी।
एजेंसी का आरोप है कि वास्तव में कोई भुगतान नहीं हुआ और बिक्री दस्तावेजों में झूठे विवरण शामिल थे, जिनमें एक ऐसे चेक का उल्लेख भी था जो कभी जारी या भुनाया नहीं गया।
ईडी ने यह भी दावा किया है कि स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए जमीन का कम मूल्य दिखाया गया और अपराध की आय को कई कंपनियों के जरिए घुमाया गया।
एजेंसी ने लगभग 58 करोड़ रुपये को “अपराध की आय” बताया है और वाड्रा से जुड़े 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है, जिनकी कीमत 38.69 करोड़ रुपये बताई गई है।
15 अप्रैल को राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने ईडी की चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए राबर्ट वाड्रा सहित आठ अन्य लोगों को समन जारी किया था।
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



