Supreme Court UAPA Verdict: सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों से जुड़े केस में उमर खालिद को जमानत न देने वाले फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. उन्होंने कहा कि अदालतों को जमानत मामलों में संतुलित और संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। बता दें कि यह टिप्पणी उस वक्त आई जब, सैयद इफ्तिखार अंद्राबी की जमानत याचिका मंजूर की जा रही थी।
Supreme Court UAPA Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) में जस्टिस B. V. Nagarathna और जस्टिस Ujjal Bhuyan की स्पेशल पीठ ने जम्मू-कश्मीर के कथित नार्को-टेरर मामले में जेल में बंद आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी. ये दोनों आरोपी पिछले कई सालों से जेल में बंद है। जबकि उसके पास से सीधे तौर पर कोई ड्रग्स नहीं मिले थे।
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अदालत ने यह टिप्पणी की कि इस मामले में एक अहम सवाल यह है कि UAPA की धारा 43D(5) के कड़े प्रावधानों और किसी व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता के अधिकार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बनाए गए कड़े कानून ज़रूरी हैं; लेकिन, उन्हें किसी व्यक्ति की संवैधानिक आज़ादी को पूरी तरह से खत्म करने का ज़रिया नहीं बनने दिया जा सकता।
UAPA bail law India: किस मामले की थी सुनवाई?

बता दें कि जम्मू कश्मीर के एक नार्को टेरर मामले में आरोपी सैय्यद इफ्तिखार अंद्राबी कई सालों से जेल में बंद है। आरोपी पिछले 5 साल से जेल में बंद था। गनीमत रही कि आरोपी के पास से कोई नारकोटिक्स सब्सटेंस नहीं मिले थे। इस केस की सुनवाई करते हुए जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने UPA के तहत जमानत के कानून पर अहम बयान दिया है।
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