तेलंगाना में रोहित वेमुला अधिनियम के लिए कैबिनेट उप-समिति का गठन

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हैदराबाद, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। तेलंगाना सरकार ने शुक्रवार को एक कैबिनेट उप-समिति का गठन किया। यह समिति ‘रोहित वेमुला तेलंगाना (उच्च शिक्षा में पहचान आधारित भेदभाव रोकथाम) विधेयक, 2026’ पर अध्ययन करेगी और कानून बनाने के लिए सिफारिशें देगी। पांच सदस्यीय समिति का नेतृत्व उपमुख्यमंत्री और वित्त, योजना एवं ऊर्जा मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क कर रहे हैं। मंत्रियों एन. उत्तम कुमार रेड्डी, दामोदर राजनरसिम्हा, दुद्दिल्ला श्रीधर बाबू और पोनम प्रभाकर समिति के सदस्य हैं। इस संबंध में मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव ने शुक्रवार को एक सरकारी आदेश जारी किया। सरकार के अनुसूचित जाति विकास विभाग के विशेष मुख्य सचिव…

हैदराबाद, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। तेलंगाना सरकार ने शुक्रवार को एक कैबिनेट उप-समिति का गठन किया। यह समिति ‘रोहित वेमुला तेलंगाना (उच्च शिक्षा में पहचान आधारित भेदभाव रोकथाम) विधेयक, 2026’ पर अध्ययन करेगी और कानून बनाने के लिए सिफारिशें देगी।

पांच सदस्यीय समिति का नेतृत्व उपमुख्यमंत्री और वित्त, योजना एवं ऊर्जा मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क कर रहे हैं। मंत्रियों एन. उत्तम कुमार रेड्डी, दामोदर राजनरसिम्हा, दुद्दिल्ला श्रीधर बाबू और पोनम प्रभाकर समिति के सदस्य हैं।

इस संबंध में मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव ने शुक्रवार को एक सरकारी आदेश जारी किया। सरकार के अनुसूचित जाति विकास विभाग के विशेष मुख्य सचिव सब्यसाची घोष इस उप-समिति के संयोजक होंगे।

सरकारी आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट उप-समिति जल्द से जल्द अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी।

23 मार्च को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने निर्णय लिया था कि प्रस्तावित रोहित वेमुला अधिनियम के लिए नियम और प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने हेतु एक उप-समिति गठित की जाएगी। यह कानून शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए बनाया जाएगा।

कांग्रेस ने 2023 के राज्य विधानसभा चुनाव में रोहित वेमुला अधिनियम लाने का वादा किया था।

पिछले वर्ष लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तेलंगाना सरकार से रोहित वेमुला अधिनियम लागू करने का आग्रह किया था।

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को लिखे पत्र में उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए कानून बनाने की अपील की थी।

रोहित वेमुला, हैदराबाद विश्वविद्यालय के 26 वर्षीय दलित शोध छात्र थे। उन्होंने 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या की थी। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया था। उनकी पीएचडी छात्रवृत्ति निलंबित कर दी गई थी और एबीवीपी सदस्यों के साथ कथित विवाद के बाद उनका स्टाइपेंड भी रद्द कर दिया गया था।

उनकी मृत्यु के बाद देशभर के कैंपसों में जातिगत भेदभाव के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।

राहुल गांधी ने हैदराबाद विश्वविद्यालय के दौरे के दौरान वादा किया था कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है तो रोहित वेमुला अधिनियम लाया जाएगा।

जनवरी में कर्नाटक से आए ‘जस्टिस फॉर रोहित वेमुला कैंपेन कमेटी’ के सदस्यों के साथ बैठक में उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार जल्द ही रोहित वेमुला अधिनियम लाएगी, ताकि शैक्षणिक संस्थानों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ भेदभाव को रोका जा सके।

समिति ने रोहित वेमुला अधिनियम, 2025 का एक मसौदा भी प्रस्तुत किया है।

–आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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