Oil-Gas Prices Drop: ईरान ने एक अहम फैसला लेते हुए 49 दिनों बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोल दिया है। इस फैसले से वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत की लहर दौड़ गई है और तेल-गैस की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने घोषणा की कि युद्धविराम के बचे हुए समय के दौरान होर्मुज स्ट्रेट सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए खुला रहेगा। इससे पहले क्षेत्र में तनाव के कारण इस रास्ते पर आवाजाही बाधित हो गई थी। अब जहाजों की आवाजाही सामान्य होने से वैश्विक व्यापार को बड़ा सहारा मिला है।
Oil-Gas Prices Drop: तेल और गैस की कीमतों में भारी गिरावट
होर्मुज खुलने की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड करीब 8.5 फीसदी गिरकर लगभग 90.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी करीब 9.4 फीसदी टूटकर 85.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यूरोप में गैस की कीमतों में भी लगभग 8.5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। यह संकेत है कि बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कम हुई है।
इस घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया कि ईरान से जुड़े संघर्ष को समाप्त करने के लिए जल्द कोई समझौता हो सकता है। हालांकि इसकी समयसीमा तय नहीं है, लेकिन इस तरह की खबरों से निवेशकों और बाजार में भरोसा बढ़ा है।
भारत के लिए क्यों है बड़ी राहत
होर्मुज स्ट्रेट का खुलना भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात का करीब 40-50 प्रतिशत खाड़ी देशों जैसे इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से इसी मार्ग के जरिए मंगाता है। जब होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ था, तब भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा। मार्च 2026 में देश का कच्चे तेल का आयात करीब 15 प्रतिशत तक घट गया था।
इस कमी को पूरा करने के लिए भारत को रूस से तेल आयात बढ़ाना पड़ा, जिसमें लगभग 90 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई। इसके अलावा, एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई भी प्रभावित हुई। भारत जहां पहले 90 प्रतिशत एलपीजी इसी रास्ते से मंगाता था, वह घटकर करीब 40 प्रतिशत रह गया। इससे देश में रसोई गैस की कमी महसूस की गई।
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
अब जब होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल गया है और तेल की कीमतों में गिरावट आई है, तो इसका सीधा फायदा भारत को मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर की कमी आती है, तो भारत का सालाना आयात बिल 1.5 से 2 अरब डॉलर तक कम हो सकता है। इसका असर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
ऊर्जा बाजार फिलहाल स्थिरता की ओर बढ़ता दिख रहा है। अगर हालात ऐसे ही बने रहते हैं, तो आने वाले समय में कीमतों में और स्थिरता देखने को मिल सकती है। हालांकि, यह पूरी तरह क्षेत्रीय स्थिति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर निर्भर करेगा।
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