कोलकाता एयरपोर्ट पर बैग में मैगजीन-कारतूत मिलने के मामले में तृणमूल पार्षद गिरफ्तार

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कोलकाता, 6 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में डायमंड हार्बर उपमंडल के तहत पुजाली नगरपालिका के वार्ड नंबर 14 से तृणमूल कांग्रेस पार्षद आमिरुल शेख इस्लाम को कोलकाता एयरपोर्ट पर बैग से पिस्टल की मैगजीन और कारतूस मिलने के पुराने मामले में सात महीने बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, आमिरुल शेख इस्लाम को शस्त्र अधिनियम, 1959 के तहत दर्ज मामले में बुधवार को गिरफ्तार किया गया। यह मामला 21 सितंबर 2025 का है, जब उन्हें नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर उस समय हिरासत में लिया गया था, जब उनके…

कोलकाता, 6 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में डायमंड हार्बर उपमंडल के तहत पुजाली नगरपालिका के वार्ड नंबर 14 से तृणमूल कांग्रेस पार्षद आमिरुल शेख इस्लाम को कोलकाता एयरपोर्ट पर बैग से पिस्टल की मैगजीन और कारतूस मिलने के पुराने मामले में सात महीने बाद गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस के अनुसार, आमिरुल शेख इस्लाम को शस्त्र अधिनियम, 1959 के तहत दर्ज मामले में बुधवार को गिरफ्तार किया गया। यह मामला 21 सितंबर 2025 का है, जब उन्हें नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर उस समय हिरासत में लिया गया था, जब उनके बैग की स्कैनिंग के दौरान एक मैगजीन और छह जिंदा कारतूस पाए गए थे।

उस समय उन्होंने दावा किया था कि उनके पास इन वस्तुओं को रखने की विधिवत अनुमति और संबंधित हथियार का वैध लाइसेंस है। उन्होंने यह भी कहा था कि उस समय दस्तावेज उनके पास नहीं थे, लेकिन वह बाद में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सभी जरूरी कागजात उपलब्ध करा देंगे।

हालांकि, पुलिस के बार-बार नोटिस देने के बावजूद वह कभी भी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए सामने नहीं आए। इसके बाद पुलिस ने नई एफआईआर दर्ज कर मामले की ताजा जांच शुरू की और अंततः बुधवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

जांच अधिकारी ने बताया, “उन्हें दस्तावेज जमा करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन वह ऐसा करने में विफल रहे। इसलिए नई एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई और उसी के आधार पर आज उन्हें गिरफ्तार किया गया।”

पिछले साल सितंबर में कोलकाता एयरपोर्ट पर मैगजीन और कारतूस के साथ हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस पर सवाल उठे थे कि केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर उन्हें क्यों छोड़ दिया गया।

उस समय कई लोगों ने आरोप लगाया था कि एक प्रभावशाली पार्षद होने के कारण पुलिस ने उन्हें राजनीतिक संरक्षण देते हुए ढील दी। हालांकि, अंततः पुलिस कार्रवाई से वह बच नहीं सके और सात महीने बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

–आईएएनएस

डीएससी

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