डीएमके के 78वें स्थापना दिवस पर उद्धयनिधि स्टालिन बोले, आम लोगों के हाथ में पहुंचाई राजनीति

Summary :

चेन्नई, 17 सितंबर (आईएएनएस)। द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) के युवा विंग सचिव उद्धयनिधि स्टालिन ने गुरुवार को पार्टी के 78वें स्थापना दिवस पर कहा कि डीएमके ने राजनीति को विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे आम लोगों के हाथों तक पहुंचाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उद्धयनिधि ने कहा कि डीएमके की स्थापना बारिश से भीगे एक दिन हुई थी, जब 40 वर्ष की उम्र में सी.एन. अन्नादुरई ने अपने युवा साथियों के साथ पार्टी की शुरुआत की थी। उन साथियों में 20 वर्ष की उम्र के एम. करुणानिधि भी शामिल थे। उन्होंने…

चेन्नई, 17 सितंबर (आईएएनएस)। द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) के युवा विंग सचिव उद्धयनिधि स्टालिन ने गुरुवार को पार्टी के 78वें स्थापना दिवस पर कहा कि डीएमके ने राजनीति को विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे आम लोगों के हाथों तक पहुंचाया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उद्धयनिधि ने कहा कि डीएमके की स्थापना बारिश से भीगे एक दिन हुई थी, जब 40 वर्ष की उम्र में सी.एन. अन्नादुरई ने अपने युवा साथियों के साथ पार्टी की शुरुआत की थी। उन साथियों में 20 वर्ष की उम्र के एम. करुणानिधि भी शामिल थे।

उन्होंने कहा कि सत्ता में रहने या विपक्ष में रहने, दोनों ही परिस्थितियों में डीएमके ने अपने 78 वर्षों के सफर में तमिल समाज को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया है।

उद्धयनिधि ने कहा कि डीएमके की राजनीति हमेशा सामाजिक न्याय, राज्यों के अधिकार, महिला सशक्तिकरण और औद्योगिक विकास जैसे मूल सिद्धांतों पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि मद्रास राज्य का नाम बदलकर तमिलनाडु करने से लेकर राज्यों को अधिक अधिकार दिलाने की लगातार मांग तक, पार्टी ने तमिलनाडु के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है।

डीएमके की स्थापना 17 सितंबर 1949 को समाज सुधारक पेरियार ई.वी. रामासामी के नेतृत्व वाले द्रविड़र कझगम से अलग होकर सी.एन. अन्नादुरई ने की थी। पार्टी की पहली बैठक चेन्नई के रोयापुरम स्थित रॉबिन्सन पार्क में भारी बारिश के बीच हुई थी और अन्नादुरई इसके पहले महासचिव बने थे।

द्रविड़र कझगम जहां मुख्य रूप से सामाजिक सुधार आंदोलन तक सीमित रहा और चुनावी राजनीति से दूर रहा, वहीं डीएमके ने चुनाव लड़ने और विधायी शक्ति के जरिए अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

डीएमके ने 1967 में अन्नादुरई के नेतृत्व में पहली बार तमिलनाडु में सरकार बनाई और राज्य में कांग्रेस के लंबे प्रभुत्व का अंत किया। अन्नादुरई के निधन के बाद एम. करुणानिधि ने करीब पांच दशक तक पार्टी का नेतृत्व किया और अब डीएमके की कमान एम.के. स्टालिन के हाथों में है।

उद्धयनिधि ने कहा कि दमन, राजनीतिक संकट और नए विरोधियों के उभरने के बावजूद एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “काला और लाल सिर्फ रंग नहीं हैं, बल्कि हमारी जिंदगी हैं।” पार्टी के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूरी निष्ठा के साथ काम करने का आह्वान किया और डीएमके के दीर्घ एवं मजबूत भविष्य की कामना की।

–आईएएनएस

डीएससी

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.