Garuda Purana: मृत्यु के बाद क्यों नहीं जलता घर में चूल्हा? गरुड़ पुराण की यह बात चौका देगी!

Summary :

गरुड़ पुराण और सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, घर में किसी सदस्य की मृत्यु होने पर कुछ समय तक चूल्हा न जलाने के कई महत्वपूर्ण कारण बताए गए हैं। माना जाता है कि मृत्यु के बाद आत्मा कुछ समय तक अपने घर और परिवार के आस-पास रहती है। इस दौरान सामान्य गतिविधियों, जैसे खाना पकाने, से आत्मा को दुख और अशांति हो सकती है। चूल्हा न जलाकर मृतक की आत्मा को सम्मान और शांति प्रदान की जाती है।

Death ke baad ghar me chulha kyu nahi jalate: सनातन धर्म में इंसान के जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कार बताए गए हैं। इनमें अंतिम संस्कार सबसे मुख्य है। गरुड़ पुराण में अंतिम संस्कार के नियम बताए गए हैं। इन्हीं नियमों में से एक है कि मृत्यु के बाद घर में चूल्हा न जलाना। मान्यता है कि, ऐसा करने से मृतक की आत्मा को शांति मिलती है, परिवार को दुख सहने का समय मिलता है और घर की सफाई भी हो जाती है। आइए, जानते हैं गरुड़ पुराण में इसे लेकर क्या लिखा है।

गरुड़ पुराण में क्या लिखा है?

Gas Stove
Gas Stove (Source: Social Media)

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की जाने वाली सभी रस्मों और नियमों की पूरी जानकारी दी गई है। इसमें लिखा है कि किसी के गुजर जाने के बाद कुछ समय तक घर में आम दिनों की तरह कामकाज नहीं करना चाहिए। इससे आत्मा को शांति मिलती है और परिवार को शोक मनाने का वक्त मिलता है।

आत्मा की शांति के लिए

माना जाता है कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति की आत्मा कुछ समय तक अपने घर और परिवार के पास ही रहती है। अगर ऐसे माहौल में रोज की तरह खाना बनाना और काम शुरू कर दिया जाए, तो आत्मा को दुख और अशांति होती है। इसलिए आत्मा के सम्मान और परिवार के शोक के लिए चूल्हा नहीं जलाया जाता।

सूतक का समय

किसी के निधन के बाद 3 से 13 दिनों तक सूतक माना जाता है। इस दौरान चूल्हा न जलाने जैसे कई कड़े नियमों का पालन होता है। यह समय दुख प्रकट करने, घर की शुद्धि करने और मन की शांति के लिए होता है।

अग्नि की पवित्रता

Gas Stove
Gas Stove(Source: Social Media)
हिंदू धर्म में अग्नि को ईश्वर का रूप माना जाता है, जिसका इस्तेमाल पूजा-पाठ और शुद्ध भोजन पकाने के लिए होता है। घर में मृत्यु होने पर शोक का माहौल होता है, इसलिए दाह संस्कार पूरा होने तक घर की रसोई में अग्नि जलाना अशुभ और अग्नि देव का अनादर माना जाता है।

घर की सफाई और सेहत

मृत्यु के बाद शरीर में धीरे-धीरे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जो हवा में फैल सकते हैं। इसलिए दाह संस्कार के बाद पूरे घर की अच्छी तरह सफाई की जाती है, कपड़े धोए जाते हैं और सब स्नान करते हैं। जब तक यह सफाई पूरी न हो जाए, तब तक खाना बनाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

मानसिक और सामाजिक कारण

दुख के इस समय में परिवार को खाना बनाने की चिंता से दूर रखा जाता है, ताकि वे अपने गम से उबर सकें। इस दौरान रिश्तेदार और पड़ोसी उनके लिए खाना लेकर आते हैं। इससे आपसी रिश्ते मजबूत होते हैं और परिवार को सहारा मिलता है।

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।