गरुड़ पुराण में क्या लिखा है?

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद की जाने वाली सभी रस्मों और नियमों की पूरी जानकारी दी गई है। इसमें लिखा है कि किसी के गुजर जाने के बाद कुछ समय तक घर में आम दिनों की तरह कामकाज नहीं करना चाहिए। इससे आत्मा को शांति मिलती है और परिवार को शोक मनाने का वक्त मिलता है।
आत्मा की शांति के लिए
माना जाता है कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति की आत्मा कुछ समय तक अपने घर और परिवार के पास ही रहती है। अगर ऐसे माहौल में रोज की तरह खाना बनाना और काम शुरू कर दिया जाए, तो आत्मा को दुख और अशांति होती है। इसलिए आत्मा के सम्मान और परिवार के शोक के लिए चूल्हा नहीं जलाया जाता।
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घर की सफाई और सेहत
मृत्यु के बाद शरीर में धीरे-धीरे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जो हवा में फैल सकते हैं। इसलिए दाह संस्कार के बाद पूरे घर की अच्छी तरह सफाई की जाती है, कपड़े धोए जाते हैं और सब स्नान करते हैं। जब तक यह सफाई पूरी न हो जाए, तब तक खाना बनाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
मानसिक और सामाजिक कारण
दुख के इस समय में परिवार को खाना बनाने की चिंता से दूर रखा जाता है, ताकि वे अपने गम से उबर सकें। इस दौरान रिश्तेदार और पड़ोसी उनके लिए खाना लेकर आते हैं। इससे आपसी रिश्ते मजबूत होते हैं और परिवार को सहारा मिलता है।


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