बेंगलुरु, 12 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक में 2026-27 के राज्य बजट को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र ने गुरुवार को राज्य बजट की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि राज्य की कर्नाटक सरकार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के बजाय कर्ज लेने को प्राथमिकता दे रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि कर्ज बढ़ाना रही है, जबकि राज्य के समग्र विकास को सुनिश्चित करने में वह असफल रही है।
विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान विजयेंद्र ने कहा कि सरकार भले ही विकास को प्राथमिकता देने का दावा कर रही हो, लेकिन बजट में किए गए आवंटन में यह प्रतिबिंबित नहीं होता।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जल संसाधन विभाग को 2025-26 में 22,190 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था, जबकि 2026-27 के लिए यह राशि बढ़ाकर केवल 22,430 करोड़ रुपए कर दी गई है। उनके अनुसार यह बढ़ोतरी बेहद मामूली है और इससे बड़े पैमाने पर विकास कार्यों को गति नहीं मिल सकती।
उन्होंने आगे कहा कि कुल आवंटित राशि में से लगभग 8,500 करोड़ रुपए वेतन भुगतान पर और करीब 4,400 करोड़ रुपए ब्याज चुकाने में खर्च हो जाएंगे। ऐसे में वास्तविक विकास कार्यों के लिए पूंजी निवेश के रूप में मात्र 9,290 करोड़ रुपए ही बचेंगे।
विजयेंद्र के मुताबिक, पिछली भाजपा सरकार के दौरान शुरू की गई कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं वर्तमान में 70 से 80 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी हैं, लेकिन इन्हें पूरा करने के लिए करीब 90,000 करोड़ रुपए की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर धनराशि जारी नहीं की गई तो इन परियोजनाओं की लागत बढ़कर लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।
भाजपा नेता ने कहा कि जब पूंजीगत कार्यों के लिए केवल 9,290 करोड़ रुपए ही उपलब्ध होंगे तो इन परियोजनाओं को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य का राजस्व व्यय लगातार तेजी से बढ़ रहा है।
उनके मुताबिक, 2022-23 में जहां यह 2,15,584 करोड़ रुपए था, वहीं 2026-27 में बढ़कर 3,38,007 करोड़ रुपए हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार भारी मात्रा में कर्ज ले रही है, लेकिन इन संसाधनों का विकास कार्यों में प्रभावी उपयोग नहीं किया जा रहा है।
विजयेंद्र ने राज्य सरकार की कैबिनेट रैंक की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के पास करीब 139 विधायक होने के बावजूद कई अन्य व्यक्तियों को भी कैबिनेट स्तर का दर्जा दिया जा रहा है। उनके अनुसार, सरकार की विभिन्न गारंटी योजनाओं के राज्य और जिला स्तर के अध्यक्षों को भी कैबिनेट रैंक प्रदान की गई है।
उन्होंने दावा किया कि कुल मिलाकर लगभग 144 लोगों को कैबिनेट का दर्जा दिया गया है, जिन पर कार्यालय सुविधाओं, वेतन और निजी सहायकों सहित हर महीने करीब 3 लाख से 3.5 लाख रुपए तक का खर्च आ रहा है।
–आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
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