India 3000 Aircraft Goal 2036: देश का विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार की राह पर है और आने वाले वर्षों में विमानों के साथ-साथ पायलटों की मांग में भी बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने कहा कि वर्तमान में भारत के एयरस्पेस में करीब 1700 विमान उड़ान भर रहे हैं, जबकि इसके दोगुने विमानों के ऑर्डर पहले ही दिए जा चुके हैं। अगले 15 वर्षों में ये सभी विमान सेवा में आ जाएंगे और वर्ष 2036 तक विमानों की संख्या बढ़कर लगभग 3000 हो जाएगी।
राम मोहन नायडू ने बताया कि इस तेज विस्तार को देखते हुए अगले 10 से 12 वर्षों में देश को करीब 10 हजार नए पायलटों की जरूरत पड़ेगी। अनुमान के मुताबिक हर साल लगभग 1500 पायलटों की संख्या बढ़ानी होगी, ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। नायडू ने कहा कि भारत का विमानन क्षेत्र इस समय देश के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल है, जो सालाना 10 से 12 प्रतिशत की दर से विकास कर रहा है।
15 वर्षों तक जारी रहने की उम्मीद
यह वृद्धि अगले 15 वर्षों तक जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डों, यात्रियों और विमानों की बढ़ती संख्या के साथ एक ऐसे कुशल कार्यबल की जरूरत है, जो वैश्विक मानकों पर खरा उतर सके। उन्होंने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। सड़क, रेल, बंदरगाह और हवाई अड्डों के बीच बेहतर तालमेल भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की नई पहचान बन रहा है।मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आज का विमानन क्षेत्र केवल यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ), कौशल विकास, प्रशिक्षण और स्वदेशी विमानन उपकरणों के निर्माण जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती दे रहे हैं।
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