India-US Relations: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबीओ और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच फोन पर बातचीत हुई और कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई है। इसकी जानकारी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और एस जयशंकर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की है। सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बताया कि दोनों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है और अगले महीने संभावित बैठक के संबंध में भी चर्चा हुई है।

विकास संबंधित मुद्दों पर हुई चर्चा
सर्जियो गोर ने एक्स पर लिखा कि मार्को रुबीओ और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ एक सकारात्मक बातचीत हुई। उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार वार्ता, महत्वपूर्ण खनिजों और अगले महीने संभावित बैठक के संबंध में आगे के कदमों पर चर्चा की।
Just concluded a good conversation with @SecRubio.
Discussed trade, critical minerals, nuclear cooperation, defence and energy.
Agreed to remain in touch on these and other issues.
🇮🇳 🇺🇸
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) January 13, 2026
वहीं, एस जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि मार्को रुबीओ के साथ एक अच्छी बातचीत समाप्त हुई। व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, परमाणु सहयोग, रक्षा और ऊर्जा पर चर्चा हुई। इन और अन्य मुद्दों पर संपर्क में रहने पर सहमति बनी है। टैरिफ, रूस के साथ तेल के कारोबार और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर यूएस के दावे को खारिज किए जाने के बाद दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ गए। हालांकि, व्यापार को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

India-US Relations: पीएम मोदी पर अमेरिकी सांसदों का बयान
इस बीच, अमेरिका के प्रभावशाली सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत की वैश्विक भूमिका को आकार देने वाला एक महत्वपूर्ण नेताबताया। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए, प्रतिनिधि रिच मैककॉर्मिक ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण भारत के विकास लक्ष्यों के अनुरूप एक मजबूत राष्ट्रीय फोकस को दर्शाता है। मैककॉर्मिक ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी एक अच्छे अर्थ में बेहद राष्ट्रवादी हैं।

उन्होंने आगे कहा कि वह अपने देश की देखभाल ठीक वैसे ही कर रहे हैं जैसे हम अपने देश की करते हैं। वह अपने देश में उत्पादकता, विस्तार और प्रौद्योगिकी लाना चाहते हैं। मैककॉर्मिक ने कहा कि अमेरिकी सांसद प्रधानमंत्री मोदी के घरेलू क्षमता निर्माण पर जोर देने को समझते हैं, जिसमें रक्षा और विनिर्माण क्षेत्र भी शामिल हैं।


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