हैदराबाद : उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने ‘‘पश्चिमोन्मुखी जीवन शैली’’ छोड़कर स्वस्थ खाने और जीने की भारतीय परंपराओं की ओर लौटने का रविवार को आह्वान किया। नायडू ने यहां स्वर्ण भारत ट्रस्ट (एसबीटी) शाखा के दूसरे वर्षगांठ समारोह के दौरान कहा कि यह समय है जब भारतीयों ने अपनी जीवन शैली में बदलाव करें और स्वस्थ जीवन के पारंपरिक तरीकों पर वापस लौटें। उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने पूर्वजों के रीति-रिवाजों और प्रथाओं का पालन करने और पश्चिम-उन्मुख जीवन शैली का त्याग करने की जरूरत है।’’ उपराष्ट्रपति ने कहा कि पारंपरिक खाद्य आदतें और रीति-रिवाज न केवल कसौटी पर खरे उतरते है बल्कि ये आरोग्य भी होते हैं क्योंकि ये प्रत्येक मौसम और क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें जीवन जीने के अपने सरल लेकिन प्रभावी तरीकों से स्वस्थ आहार की आदतों और जीवन शैली को अपनाने के लिए युवाओं को जागरूक करने और शिक्षित करने की आवश्यकता है।’’ नायडू ने कहा, ‘‘सहभागिता और देखभाल भारतीय दर्शन का मूल है। वसुधैव कुटुम्बकम (पूरी दुनिया एक परिवार है)…सर्व जन सुखिनो भवन्तु (सभी को खुश रहने दें), (यह दर्शन) भारत की महानता है।’’ उपराष्ट्रपति ने कहा,‘‘सभी टॉम, डिक और हैरी ने आकर हम पर हमला किया, हम लोगों पर शासन किया, हमें बर्बाद किया, हमें लूटा और हमें धोखा दिया, यहां तक कि छोटे देशों को भी। भारत ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया।’’ उन्होंने कहा,‘‘हिंदू संस्कृति, भारतीयता बहुत सहिष्णु हैं। यह सभी का विकास चाहती है।’’ उन्होंने दोहराया कि क्षेत्रीय भाषाओं को संरक्षित किया जाना चाहिए। इस मौके पर मौजूद केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यहां विश्व स्तरीय संस्था के रूप में एसबीटी परिसर की प्रशंसा की।


Download Android App
Download iOS App



