Jan Vishwas Bill 2026 : भारत की कानूनी व्यवस्था को लेकर लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि क्या छोटी-छोटी तकनीकी गलतियों या मामूली नियम उल्लंघनों के लिए भी आपराधिक मुकदमे और जेल की सजा जरूरी है। कई मामलों में साधारण चूक भी गंभीर अपराध की तरह दर्ज हो जाती है, जिससे आम नागरिकों और कारोबारियों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
इसी पृष्ठभूमि में देश की संसद से ‘जन विश्वास विधेयक’ पारित हो गया है। अब गजट नोटिफिकेशन जारी होते ही यह बिल कानून की शक्ल ले लेगा. इस बिल के कानून बन जाने के बाद मौजूदा कानून के कई अपराध, अपराध के दायरे से ही बाहर हो जाएंगे। इस बिल का उद्देश्य छोटी गलतियों को आपराधिक दायरे से बाहर निकालना और कानून व्यवस्था को अधिक सरल तथा भरोसेमंद बनाना है। सरकार का कहना है कि शासन व्यवस्था डर और दंड के आधार पर नहीं, बल्कि विश्वास के आधार पर चलनी चाहिए।
देश में कारोबार से जुड़े माहौल को बेहतर बनाने के लिए और इस क्षेत्र में होने वाले छोटे-छोटे क्राइम को रोकने के लिए भारत सरकार ने जन विश्वास विधेयक को गुरुवार को मंजूरी दे दी है. इस विधेयक में 79 कानूनों के 784 प्रावधनों में संशोधन को मंजूरी दी गई है. लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी चर्चा कर प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया. यह विधेयक एक दिन पहले लोकसभा में पारित हुआ था.
Jan Vishwas Bill 2026: क्या है यह विधेयक
पीयूष गोयल ने इस विधेयक को लेकर कहा कि सरकार देश में भरोसे की संस्कृति को मजबूत करना चाहती है। उनके मुताबिक एक ऐसा माहौल तैयार किया जाना चाहिए जिसमें लोग भय के बजाय विश्वास के साथ काम कर सकें।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून का मूल उद्देश्य लोगों को गलती सुधारने का अवसर देना है। गोयल ने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ साल पहले देश में केवल लगभग 500 स्टार्टअप थे, जबकि आज इनकी संख्या तीन लाख से भी ज्यादा हो चुकी है।
उनके अनुसार इतने बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में काम कर रहे युवाओं से छोटी-मोटी गलतियां होना स्वाभाविक है। ऐसे में उन्हें तुरंत सजा देने के बजाय सुधार का मौका देना अधिक उचित होगा।
Legal Reforms India: पहली गलती पर चेतावनी, फिर कार्रवाई

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस कानून के तहत कई मामलों में दंड की प्रक्रिया को चरणबद्ध बनाया गया है। इसके अनुसार यदि किसी से पहली बार छोटी गलती होती है तो उसे चेतावनी दी जाएगी। अगर वही गलती दोबारा होती है तो जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं तीसरी बार गंभीर उल्लंघन की स्थिति में दंड और सख्त हो सकता है तथा अदालत की कार्यवाही भी हो सकती है।
Indian Law Amendment: ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में भी बदलाव
पीयूष गोयल ने बताया कि इस विधेयक के तहत ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में भी कुछ संशोधन किए गए हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि नकली या गलत दवाओं के उत्पादन, बिक्री, आयात या वितरण से जुड़े गंभीर अपराधों के लिए मौजूदा दंड में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि बदलाव केवल उन स्थितियों के लिए किया गया है जहां छोटी तकनीकी त्रुटियां होती हैं। उदाहरण के तौर पर यदि किसी आयुष या होम्योपैथिक दवा पर निर्माता का नाम दर्ज नहीं है, तो उसके लिए कार्रवाई निर्माता के खिलाफ होनी चाहिए, न कि छोटे दुकानदारों के खिलाफ।
कई महत्वपूर्ण कानूनों में प्रस्तावित संशोधन
- इस विधेयक के जरिए कई महत्वपूर्ण कानूनों में भी बदलाव का प्रस्ताव है। इनमें भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934, बीमा अधिनियम और पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम शामिल हैं।
- इसके अलावा कोयला खान भविष्य निधि अधिनियम, पेटेंट अधिनियम, विधिक माप विज्ञान अधिनियम, छावनी अधिनियम 2006, औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 में भी संशोधन प्रस्तावित हैं।
- फार्मेसी अधिनियम 1948, दिल्ली पुलिस अधिनियम, विद्युत अधिनियम और रेलवे अधिनियम जैसे कई अन्य कानून भी इस बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
- व्यापार और प्रशासन में सुगमता बढ़ाने का प्रयास
- सरकार का कहना है कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और व्यापार तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक आसान बनाना है।
- इस विधेयक को 27 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इससे पहले मार्च 2025 में भी जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक संसद में पेश किया गया था, जिसे आगे की जांच के लिए एक प्रवर समिति को भेज दिया गया था।
- इस बिल के कानून बन जाने से कुछ तरह के अपराध अपराध श्रेणी से बाहर कर दिए जाएंगे, जैसे- ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि खत्म हो जाने पर रिन्यू कराने में हुई मामूली देरी को अपराध नहीं माना जाएगा, इस मतलब अवधि समाप्त होने के बावजूद 30 दिन तक वैलिड माना जाएगा।
- इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत राजमार्ग जाम करने या ऐसी स्थिति उत्पन्न करने के चलते जहां पहले 5 साल तक की जेल और जुर्माना होता था, उसे समाप्त कर सिर्फ जुर्माने का प्रावधान होगा।
- इसके अलावा आग का झूठा अलार्म देना अब अपराध नहीं है। और जन्म मृत्य की सूचना न देना अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। बिजली से जुड़े अपराध में यानि बिजली विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन न करने पर अब जेल नहीं होगी, हां जुर्माना लगेगा।
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