रांची, 16 अगस्त (आईएएनएस)। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया का मकसद किसी पात्र भारतीय नागरिक को परेशान करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को सही और अपडेट करना है। उन्होंने कहा कि पात्र भारतीय नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
जिला निर्वाचन पदाधिकारी, ईआरओ, एईआरओ और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय उनकी मदद के लिए तैयार हैं। के रवि कुमार ने रविवार को बताया कि 24 अगस्त से नो-मैपिंग, तार्किक विसंगति और दूसरी श्रेणियों में आने वाले मतदाताओं के मामलों की सुनवाई शुरू होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से बाहर न हो और कोई अपात्र या विदेशी नागरिक इसमें शामिल न हो।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि ऐसे मामलों में बीएलओ संबंधित मतदाता को ईआरओ की ओर से जारी नोटिस देगा। नोटिस मिलने के बाद दस्तावेज जमा करने के लिए पहले सात दिन का समय मिलेगा। इस अवधि में दस्तावेज नहीं देने पर बीएलओ दोबारा संपर्क करेगा और फिर सात दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि दावा-आपत्ति दाखिल करने की अवधि 5 अगस्त से 15 सितंबर तक है। इन दावों और आपत्तियों का निपटारा 14 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि इस समय नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने और मतदाता सूची में दर्ज गलतियों को सुधारने का काम भी चल रहा है। ऐसे लोग जिनका नाम किसी दूसरे राज्य की मतदाता सूची में दर्ज है और वे झारखंड में अपना नाम दर्ज कराना चाहते हैं, वे फॉर्म-8 और जरूरी घोषणा पत्र जमा कर सकते हैं। एक ही परिवार के सदस्यों का नाम एक ही मतदान केंद्र की सूची में दर्ज करने का काम भी किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान मिले आवेदन और आंकड़ों में यदि कोई गलती या विसंगति सामने आती है तो नोटिस और सुनवाई के जरिए उसका सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद पात्र लोगों के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे अपने नाम और दूसरे विवरणों की जांच जरूर करें और जरूरत पड़ने पर समय पर जरूरी दस्तावेज जमा करें।
के. रवि कुमार ने कहा कि एसआईआर के बाद तैयार मतदाता सूची को स्थायी रिकॉर्ड के तौर पर रखा जाएगा। इसमें दर्ज सही और प्रमाणित जानकारी भविष्य में मतदाता और उसके परिवार के लिए भी महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकती है। उन्होंने राजनीतिक दलों, बूथ लेवल एजेंटों और आम लोगों से अपील की कि किसी विदेशी नागरिक को मतदाता सूची में शामिल कराने में सहयोग न करें।
उन्होंने कहा कि यदि कोई विदेशी नागरिक भारत की नागरिकता हासिल करना चाहता है तो उसे पहले गृह मंत्रालय से निर्धारित प्रक्रिया के तहत भारतीय नागरिकता लेनी होगी। नागरिकता मिलने से पहले मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आवेदन करना कानूनन अपराध है। एसआईआर, नोटिस, दावा-आपत्ति या जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी के लिए मतदाता निर्वाचन आयोग के टोल-फ्री नंबर 1950 पर संपर्क कर सकते हैं।
–आईएएनएस
एसएनसी/एएस
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