Lal Bahadur Shastri Death Anniversary: आज भारत के दूसरे प्रधानमंत्री, लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि है। 11 जनवरी 1996 को ताशकंद में उनका अचानक निधन हो गया था। निधन से पहले उनकी हालत ठीक थी, लेकिन अचानक विदेश में उनके निधन ने कई सवाल खड़े कर दिए। डॉक्टरों कि रिपोर्ट के अनुसार, उनकी मृत्यु हार्ट अटैक से हुई। ये रिपोर्ट सोवियत संघ के डॉक्टरों ने संयुक्त रूप से ताशकंद में दी। लेकिन उनके शव का पोस्टमार्टम नहीं किया गया, जो आज भी सवाल को जन्म देता है। आइए जानते हैं विस्तार से पूरी कहानी…
Second Prime Minister of India: समझौते के लिए ताशकंद गए थे शास्त्री

1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री समझौते के लिए ताशकंद गए हुए थे। समझौते के तुरंत बाद रात में उनकी तबीयत खराब हुई और वहीं उनका निधन हो गया। 11 जनवरी 1966 के दिन ताशकंद में शास्त्री जी का अचानक निधन और भारत में पोस्टमार्टम न होना आज भी एक ऐतिहासिक-राजनीतिक बहस और संदेह का विषय है। शास्त्री भारत में बहुत लोकप्रिय प्रधानमंत्री थे। ताशकंद में भारतीय दूतावास के डॉक्टर और सोवियत डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। यही उनकी मृत्यु की वजह भी बना।
क्यों नहीं किया गया पोस्टमार्टम?
हार्ट अटैक को प्राकृतिक मृत्यु माना जाता है, इस स्थिति में पोस्टमार्ट्म को अनिवार्य नहीं समझा जाता था। सोवियत संघ में उनकी पहली मेडिकल जांच हुई थी। बाद में, उनकी मृत्यु के बाद ताशकंद में डॉक्टरों ने उनके शव की जांच की। भारत सरकार ने सोवियत संघ की मेडिकल रिपोर्ट को स्वीकार किया, क्योंकि उस समय सोवियत संघ भारत का करीबी दोस्त था। इस वजह से भारत में फिर से पोस्टमार्टम करवाने की जरूरत नहीं महसूस की गई।
Lal bahadur Shastri: शास्त्री जी की मौत पर क्यों उठे सवाल?

शास्त्री जी की पत्नी ललिता शास्त्री ने बाद में कहा कि उनसे पोस्टमार्टम के लिए औपचारिक सहमति नहीं ली गई थी। उस समय शोक और अफरा-तफरी में उन्होंने भी जोर नहीं डाला। हालांकि ये बात भी कही जाती है कि अगर भारत में उनका पोस्टमार्टम होता या जहर देने की आशंका उठती। कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दरअसल ये संदेह इसलिए जाहिर हुआ, क्योंकि उनके शरीर पर नीलापन होने की बात सामने आई थी।
पत्रकार ने खोले शास्त्री जी की मौत के राज़
उस समय प्रसिद्ध पत्रकार कुलदीप नैयर भारत सरकार के साथ काम कर रहे थे और वह शास्त्री जी के साथ ताशकंद गए थे। अपनी आत्मकथा “Beyond the Lines” में उन्होंने शास्त्री जी की ताशकंद यात्रा और उनकी मृत्यु के बाद की घटनाओं का जिक्र किया। नैयर ने लिखा कि वह शास्त्री जी के काफ़ी करीबी थे।
10 जनवरी 1966 की रात, शास्त्री जी अपने कमरे में आराम कर रहे थे, दिन बहुत थका देने वाला और तनावपूर्ण था। आधी रात के बाद अचानक कमरे से अचानक हलचल की आवाज़ आई और डॉक्टरों और अधिकारियों की दौड़-भाग शुरू हो गई। हमें बहुत देर बाद बताया गया कि प्रधानमंत्री अब नहीं रहे। डॉक्टर आए, लेकिन इलाज की कोई स्पष्ट प्रक्रिया नहीं दिखी।
नैयर लिखते हैं, “शास्त्री जी का शरीर देखने के बाद मुझे खुद असहज महसूस हुआ। उनका चेहरा सामान्य नहीं था, त्वचा पर नीलापन था और चेहरा अस्वाभाविक रूप से सूजा हुआ लग रहा था।” उन्होंने यह तो नहीं लिखा कि “ज़हर दिया गया,” लेकिन साफ़ शब्दों में कहा, “जो मैंने देखा, वह सामान्य हार्ट अटैक से मेल नहीं खाता था।” यह घटना आज भी रहस्य बनी हुई है और कुलदीप नैयर के शब्दों ने इस रहस्य को और भी गहरा कर दिया है।


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