नई दिल्ली, 15 अगस्त (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के लालकिले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रतिक्रिया दी है।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “मैं नहीं जानता हूं कि वो (राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे) किस कारण से नहीं आए होंगे।”
उन्होंने कहा, “लालकिले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में आना दो तरह का विषय है। एक यह कि आपका खुद का इस बड़े दिन को लेकर क्या संकल्प है और इसको लेकर आपके मन में कितना गरिमा का भाव है? लोकतंत्र के इस महत्वपूर्व पड़ाव पर देश पहुंचा है। 80 साल लोकतंत्र को अंगीकार किए हो चुके हैं, तब लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और परंपराओं में आपकी कितनी आस्था है। निश्चित रूप से ये दो प्रबल कारण होते हैं कि हर व्यक्ति, जो वहां अपेक्षित है, वहां रहने का प्रयास करना चाहिए।”
स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम को लेकर उन्होंने कहा, “आज अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि देश लाखों बलिदानों के बाद अर्पित स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है। यह और भी महत्वपूर्ण इसलिए है कि आजादी के उस अमर संगीत, जिसने आजादी की लड़ाई में देश को एकता के सूत्र में बांधने और आजादी के अभिन्न स्तर और स्थानों पर हो रही लड़ाई को एकरूप करने का महती कार्य किया था, उस ‘वंदे मातरम’ की 150वीं जयंती साथ में मना रहे हैं।”
शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद जब आजादी के 100 वर्ष पूरे करने तक ‘विकसित भारत’ बने, उस संकल्प को साकार करने का यह महत्वपूर्ण काल है। आज हम इसके पांचवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। पीएम मोदी ने जिस तरह आह्वान करते हुए लालकिले की प्राचीर से कहा कि ‘हम सप्त धारा’ पर काम करते हुए सात अलग-अलग वर्टिकल्स को सशक्त करते हुए भारत को आत्मनिर्भर, विकसित और सामर्थ्यशाली देश बनाएंगे।”
सभी लोगों को शुभकामनाएं देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हम अपने आप को देश को विकसित करने के लिए समर्पित करें। इस प्रार्थना के साथ बहुत सारी शुभकामनाएं देता हूं।”
लालकिले से युवाओं और महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री की घोषणाओं पर शेखावत ने कहा, “हमेशा है प्रधानमंत्री ने बोला है कि देश की युवाशक्ति, किसान, मातृशक्ति और देश का गरीब, उनकी प्राथमिकताएं हैं। एक बार फिर जब देश उनके मार्गदर्शन में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उनको और अधिक सशक्त करने के लिए प्रधानमंत्री ने नई घोषणाएं भी कीं। साथ ही, मातृशक्ति का विधायी कार्यों में प्रत्यक्ष योगदान बढ़े, इस दृष्टिकोण से उन्होंने सभी पार्टियों को उस बड़े निर्णय में साथ आने के लिए आह्वान किया है।”
–आईएएनएस
डीसीएच/
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