Marathi Mandatory in Maharashtra School: मराठी भाषा को लेकर पहले से विवाद चलता आया है। इसी बीच राज्य के शिक्षा मंत्री दादाजी भूसे ने एक अधिसूचना जारी कर राज्य भर के सभी माध्यमों और सभी प्रबंधन बोर्डों के अंदर आने वाले स्कूलों में मराठी भाषा को अनिवार्य विषय बना दिया है। साथ ही स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भूसे ने विधानसभा को सूचित किया कि इस नियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Marathi Mandatory in Maharashtra School: मराठी को अनिवार्य विषय बना दिया

दादाजी भुसे विधानसभा में विधायक हारून खान द्वारा उठाए गए एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। तभी उन्होंने कहा कि 1 मार्च, 2020 को जारी सरकारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य के सभी माध्यमों और सभी प्रशासनों के स्कूलों में मराठी को अनिवार्य विषय बना दिया गया है। कुछ अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय बोर्डों में मराठी को “द्वितीय भाषा” या “तृतीय भाषा” के रूप में पढ़ाया जाना अनिवार्य है। किसी भी हालात में मराठी को हटाया नहीं जा सकता।
Marathi Language in School: सभी स्कूलों में पढ़ाई जाएगी मराठी

विधायक हारून खान द्वारा एक विशेष विद्यालय के संबंध में उठाई गई शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए, भुसे ने कहा कि शिक्षा विभाग तुरंत उस विद्यालय का निरीक्षण करेगा। यदि यह पाया जाता है कि वहां मराठी नहीं पढ़ाई जा रही है, तो विद्यालय को कानूनी प्रावधानों से सूचित कराया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों में मराठी पढ़ाने का नियम केवल सरकारी स्कूलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि निजी, गैर-सरकारी और विदेशी बोर्डों से जुड़े स्कूलों में भी लागू किया जाएगा
Marathi Language in School: नियम तोड़ने पर मान्यता रद्द

उन्होंने कहा कि मराठी राज्य की आधिकारिक भाषा है, इसलिए यह आवश्यक है कि नई पीढ़ी इसे सीखे और इसके संरक्षण में योगदान दे। राज्य सरकार इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी। जिन स्कूलों में मराठी नहीं पढ़ाई जा रही है, उन्हें इस नियम को लागू करने का निर्देश दिया जाएगा और जो संस्थान इस आदेश का पालन करने में विफल रहेंगे, उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।
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