भारतीय भाषाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध है मोदी सरकार: गृह मंत्री Amit Shah

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राजभाषा विभाग भारतीय भाषाओं के प्रचलन को बढ़ाने में सक्रिय

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का कहना है कि दिसंबर के बाद वह हर राज्य के मुख्यमंत्री, सांसद, मंत्री और नागरिकों से उनकी ही भाषा में पत्र व्यवहार करने वाले हैं। जो लोग अपने भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए भाषा के नाम पर दुकान चलाते हैं, उनके लिए यह एक मजबूत जवाब है। भारत की एक-एक भाषा भारत की संस्कृति का गहना है।

उन्होंने राज्यसभा में कहा, “मैं आज इस मंच से कहना चाहता हूं कि तमिलनाडु की सरकार को हम दो साल से कह रहे हैं कि आप में हिम्मत नहीं है, इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई को तमिल भाषा में अनुवाद करवाने की, क्योंकि इसके पीछे आपके आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। मगर, हमारी सरकार आएगी तो हम मेडिकल और इंजीनियरिंग का कोर्स तमिलनाडु में तमिल में पढ़ाएंगे।”

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गृह मंत्री ने कहा कि ये लोग क्या कहना चाहते हैं कि हम दक्षिण भारत की भाषाओं के विरोधी हैं। हम किसी भी राज्य की भाषा के विरोधी कैसे हो सकते हैं, हम भी तो वहीं से आते हैं, मैं गुजरात से आता हूं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तमिलनाडु से आती हैं, कैसे हम विरोध कर सकते हैं। हमने भाषाओं के लिए काम किया है। हमने इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे पाठ्यक्रमों का अनुवाद क्षेत्रीय भाषाओं में किया है। जो लोग भाषा के नाम पर जहर फैला रहे हैं, मैं उनको कहना चाहता हूं कि आपको हजारों किलोमीटर दूर की कोई भाषा अच्छी लगती है। लेकिन, भारतीय भाषा अच्छी नहीं लगती।

उन्होंने कहा कि तमिल का कोई बच्चा गुजरात में काम कर सकता है, दिल्ली में काम कर सकता है, कश्मीर में काम कर सकता है। भाषा के नाम पर देश के विभाजन के लिए बहुत सारा विवाद हो चुका, अब और नहीं करना चाहिए, देश आगे बढ़ चुका है। आप विकास की बात कीजिए, आप अपने घोटाले, भ्रष्टाचार छुपाने के लिए भाषा की बात करते हैं। हम एक्सपोज करेंगे, गांव-गांव जाकर एक्सपोज करेंगे।

तमिलनाडु सरकार, केंद्र पर हिंदी भाषा थोपने का आरोप लगा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में उनके मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राजभाषा विभाग पर बात की। उन्होंने कहा कि यह विभाग भारतीय भाषाओं के प्रचलन को बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। तमिल, तेलुगू, मराठी, गुजराती, पंजाबी, बंगाली, असमिया, हर भारतीय भाषा को बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है। हिंदी सभी भारतीय भाषाओं की सखी है। हिंदी से ही सभी भारतीय भाषाएं मजबूत होती हैं और सभी भारतीय भाषाओं से हिंदी मजबूत होती है। हिंदी की किसी भारतीय भाषा से स्पर्धा नहीं है।

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