nasha mukt bharat 2029 roadmap : केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक देश को नशा मुक्त बनाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। Himachal Pradesh शिमला में पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा आयोजित ‘नशा मुक्त भारत अभियान-2026’ वार्तालाप कार्यक्रम में गृह मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया) राज कुमार और एनसीबी (NCB) के जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह ने इस विजन डॉक्यूमेंट की विस्तृत जानकारी साझा की।
व्यापक विचार-विमर्श से तैयार हुआ विजन डॉक्यूमेंट
राज कुमार ने बताया कि इस रोडमैप को तैयार करने के लिए 35 से अधिक मंत्रालयों, विभागों और एजेंसियों के साथ विचार-विमर्श किया गया। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और राज्य NCORD की बैठकों के माध्यम से 20 से अधिक उच्च स्तरीय बैठकें हुईं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद तीन समीक्षा बैठकें करने के बाद 26 जून को नई दिल्ली में 10वीं शीर्ष स्तरीय NCORD बैठक के दौरान इस ‘विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ को लॉन्च किया था।
विकसित भारत 2047 की प्रमुख आधारशिला
कार्यक्रम में जोर दिया गया कि ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य केवल मजबूत अर्थव्यवस्था पर नहीं, बल्कि अनुशासित और नशा मुक्त युवा शक्ति पर टिका है। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और नशा राष्ट्रीय सुरक्षा, परिवारों और सामाजिक ढांचे को नुकसान पहुंचाता है। इसीलिए सरकार ने नशे के खिलाफ अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है।
2019 से 2026 तक मादक पदार्थों पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक
एनसीबी जोनल डायरेक्टर अमनजीत सिंह ने आंकड़ों के जरिए बताया कि वर्ष 2019 से जुलाई 2026 के बीच 1,53,212 करोड़ रुपये मूल्य का 93.33 लाख किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किया गया। इसमें से 88,010 करोड़ रुपये की 44.88 लाख किलोग्राम ड्रग्स को नष्ट भी किया जा चुका है। इसके अलावा 3,992 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां फ्रीज की गईं और 128 अवैध गुप्त लैब्स को ध्वस्त किया गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ‘भारतपोल’ के जरिए 195 देशों के साथ सीधे इंटरपोल संपर्क स्थापित किया गया है और ‘मानस’ हेल्पलाइन (1933) से 3.33 लाख लोग जुड़ चुके हैं।
‘संपूर्ण सरकार और संपूर्ण समाज’ का दृष्टिकोण
जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक के इस तीन वर्षीय रोडमैप को ‘संपूर्ण सरकार और संपूर्ण समाज’ के मॉडल पर लागू किया जाएगा। इसमें केंद्र, राज्य, सुरक्षा एजेंसियां, शैक्षणिक संस्थान और नागरिक एक साथ मिलकर काम करेंगे। इस मिशन में गुप्त प्रयोगशालाओं को नष्ट करने, डार्कनेट और हवाला नेटवर्क को तोड़ने तथा भगोड़ों को वापस लाने पर विशेष फोकस रहेगा।
‘पता लगाना, बाधित करना, नष्ट करना’ का मंत्र
यह रोडमैप मुख्य स्तंभों पर टिका है: खुफिया जानकारी आधारित कार्रवाई, सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, मांग में कमी और क्षमता निर्माण। इसके लिए तीन स्तरीय परिचालन मंत्र तय किया गया है:
पता लगाना: ड्रग्स के स्रोत, रूट, तकनीक और मुख्य सरगनाओं की पहचान करना।
बाधित करना: लॉजिस्टिक्स, डार्कनेट नेटवर्क, हवाला और टेरर फंडिंग को रोकना।
नष्ट करना: अवैध लैब्स, कार्टेल की संपत्तियों और पूरे नेटवर्क को खत्म करना।
उपचार क्षमता में 5 गुना विस्तार और जन आंदोलन
इस योजना के तहत मार्च 2029 तक नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या 334 से बढ़ाकर 1,751 की जाएगी। बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं होंगी और हर राज्य के एक मेडिकल कॉलेज में समर्पित विभाग बनेगा। इस अभियान को जन आंदोलन बनाते हुए इसकी पहुंच 20 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ लोगों तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके साथ ही NCC, NSS और ‘माई भारत’ के जरिए 1 लाख ‘नशा मुक्त भारत मित्र’ तैयार किए जाएंगे।
100% केंद्रीय फंडिंग और शिमला में खुलेगा नया NCB ऑफिस
मादक पदार्थ विरोधी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए केंद्र सरकार 100 प्रतिशत फंडिंग करेगी। मार्च 2027 तक हर राज्य में पूरी तरह सुसज्जित ANTF तैनात होगी और जब्त सैंपलों की 30 दिनों के भीतर रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। गृह मंत्रालय हर तीन महीने में इसकी प्रगति की समीक्षा करेगा। इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिमला में एक नया एनसीबी जोनल कार्यालय स्थापित करने को मंजूरी दे दी है, जो जल्द शुरू होगा।
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