NEET PG cutoff Supreme Court: देश के मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटें भरने के लिए कटऑफ शून्य पर्सेंटाइल और स्कोर माइनस 40 करने के फैसले पर बवाल मच गया है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विरोध तेज कर दिया है। डॉक्टरों के संगठन यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।मेडिकल पीजी कोर्स की लगभग 18 हजार सीटें खाली रहने के कारण सरकार ने इन्हें भरने के उद्देश्य से नीट पीजी की कटऑफ में बड़ी कटौती की है।
हालांकि रेजिडेंट डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों का कहना है कि सीटें भरने के नाम पर न्यूनतम योग्यता मानकों को खत्म करना सही कदम नहीं है। UDF के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अरुण कुमार ने चेतावनी दी है कि इससे मेडिकल पेशे में भरोसा कमजोर होगा और मरीजों को मिलने वाली इलाज की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
NEET PG Cutoff Case: क्या है नए फैसले में?

नए फैसले के तहत सामान्य और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग कटऑफ 50 पर्सेंटाइल से घटाकर 7 पर्सेंटाइल कर दी गई है। वहीं एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए यह 40 से घटा दी गई है, जबकि बेंचमार्क दिव्यांगता वाले सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए कटऑफ 45 से घटाकर सिर्फ 5 पर्सेंटाइल कर दी गई है। इस भारी कटौती ने मेडिकल समुदाय में गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
NEET PG Cutoff Controversy: स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखा पत्र

डॉ. लक्ष्य मित्तल ने कहा कि शून्य या नकारात्मक अंक लाने वाले अभ्यर्थियों को पीजी मेडिकल ट्रेनिंग के योग्य ठहराना मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को कमजोर करता है और इससे मरीजों की सुरक्षा तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। वहीं फोर्डा ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर इस फैसले का विरोध किया है और सरकार से नीट पीजी की कटऑफ में की गई कटौती पर पुनर्विचार कर न्यूनतम क्वालिफाइंग मानकों को बहाल करने की मांग की है।
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