लखनऊ, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) से भाजपा सरकार के खिलाफ राजनीतिक हमला तेज करते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन का दावा किया।
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने से जुड़े सवाल पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पवन पांडे की हवा में अहंकारी लोग टिक नहीं पाएंगे। उन्होंने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री खुद टिकट बांटते हैं। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को अपने टिकट का भरोसा नहीं है, उन्हें पहले अपना टिकट पक्का कराने की चिंता करनी चाहिए। भाजपा की राजनीति से जनता परिचित हो चुकी है और पार्टी को अपने फैसलों का जवाब देना होगा।
उन्होंने दावा किया कि 2027 में बदलाव होगा और इसकी शुरुआत हो चुकी है। सपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी पीडीए यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पीडीए की राजनीतिक ताकत से घबराई हुई है।
सपा प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी पर अन्याय करने, पीडीए से घबराने और चुनावी प्रक्रिया में बाधाएं पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए सीईसी के इस्तीफे की मांग की। गोमतीनगर स्थित जेपीएनआईसी पहुंचकर अखिलेश यादव ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान केंद्र के मुख्य द्वार को टीन की चादरों से ढके जाने, परिसर के आसपास बैरिकेडिंग और पुलिस तथा पीएसी की तैनाती को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति के माध्यम से सत्ता और व्यवस्था को चुनौती देने का रास्ता दिखाया था। उनका आंदोलन आज भी प्रासंगिक है और समाजवादी पार्टी उसी रास्ते पर चलकर परिवर्तन लाएगी। अखिलेश यादव ने कहा, “ऐसा तो नहीं कि परिवर्तन का आगाज हो गया है। लगता है बदलाव की शुरुआत है।”
उन्होंने दावा किया कि जनता के भीतर बढ़ती पीड़ा बदलाव की प्रक्रिया को तेज करेगी। उन्होंने जयप्रकाश नारायण के योगदान को याद करते हुए कहा कि वह हमेशा दबे-कुचले लोगों के अधिकारों के लिए खड़े रहे। उन्होंने सामाजिक सुधार के क्षेत्र में विनोबा भावे के भूदान आंदोलन के योगदान को भी याद किया। जेपीएनआईसी को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार से सवाल किया कि प्रदेश में क्या इस तरह की कोई दूसरी इमारत है।
उन्होंने परिसर में बने हेलीपैड, लगभग 1,200 वाहनों की पार्किंग और निर्माण परियोजना पर खर्च को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने 800 करोड़ रुपये के आंकड़े का उल्लेख करते हुए निर्माण कार्यों, ठेकेदारों और भुगतान से जुड़े मुद्दों पर भी जवाब मांगा। सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस केंद्र को पैसों के भार में दबा दिया है और विचारधारा के महत्व को नजरअंदाज किया है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इस केंद्र को कितने रुपये में बेच दिया गया होगा। उनके मुताबिक, जयप्रकाश नारायण का आंदोलन सत्ता परिवर्तन के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का भी प्रतीक है।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग का दायित्व अधिक से अधिक लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करना और मतदान प्रक्रिया को सुचारु बनाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान लोगों को वोट डालने से रोका जाता है। दिल्ली में उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ कथित मारपीट का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल किए और उसके इस्तीफे की मांग की। लखनऊ में जलभराव की समस्या को लेकर अखिलेश यादव ने रिवरफ्रंट और पलासियो क्षेत्र का उल्लेख करते हुए सरकार और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि पहले रिवरफ्रंट की तारीफ की गई थी लेकिन अब वहां जलभराव की स्थिति सामने आ रही है। उनके अनुसार, नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण और सिंचाई विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण जल निकासी की समस्या गंभीर हुई है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि अधिकारी यह तय करने में विफल हैं कि विभिन्न क्षेत्रों का पानी किस दिशा में जाएगा और उसकी निकासी कैसे होगी। उन्होंने बंधों, नालों और पुलों की डिजाइन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जल निकासी व्यवस्था की खामियों का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
–आईएएनएस
विकेटी/एसके
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