नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। औषधीय गुणों से भरपूर पीपल के पत्ते कई समस्याओं से निपटने में उपयोग किए जाते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल, एंटीइन्फ्लेमेटरी और एंटीफंगल जैसे गुण पाए जाते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पीपल के वृक्ष में 33 करोड़ देवी-देवता निवास करते हैं। वहीं, पीपल का पेड़ कई तरह के पक्षियों और जीवों के लिए भी घर है। यह पेड़ छाया तो देता ही है, यह दिन के साथ रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है, जो प्रदूषण को कम करने और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में पीपल के औषधीय गुणों के बारे में बताया गया है कि इसके अलग-अलग हिस्सों, जैसे पत्तों से लेकर छाल तक का, प्रयोग करके बुखार, अस्थमा, खांसी, त्वचा रोग जैसी कई समस्याओं में राहत पाई जा सकती है।
सुश्रुत संहिता के अनुसार, पीपल के पत्तों का पानी सुबह खाली पेट पीने से पाचन एंजाइम सक्रिय होता है और पाचन प्रक्रिया बेहतर बनती है। साथ ही, अगर आप दाद, खाज, खुजली जैसी समस्याओं से परेशान हैं, तो पीपल के पत्तों को पीसकर उस जगह पर लगाने से त्वचा संबंधी परेशानी खत्म हो जाती है। साथ ही, यह फटी एड़ियों को भी ठीक करने में मदद करता है। पीपल के पत्तों से निकलने वाला दूध फटी हुई एड़ियों पर लगाने से कुछ ही दिनों में वे ठीक हो जाती हैं और एड़ियां नरम पड़ जाती हैं।
अगर चोट लगने के बाद त्वचा पर घाव बन जाए, तो इस पर पीपल के पत्तों का पेस्ट लगाना फायदेमंद हो सकता है। पीपल के पत्तों में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण संक्रमण से बचाव करते हैं। इससे घाव भी जल्दी ठीक हो जाता है और इंफेक्शन का जोखिम कम होता है।
चरक संहिता के अनुसार, पीपल के पत्तों में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाने से रोकने में मदद करते हैं। साथ ही, यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करने में भी सहायक होते हैं। पीपल के पत्तों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और अन्य औषधीय गुण हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
आईएएनएस
एनएस/एबीएम
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