PGI Chandigarh Health Seminar: PGI चंडीगढ़ में आईबीडी डीपी पर जागरूकता सेमिनार आयोजित, डॉक्टर उषा दत्ता ने छोटी आंत की बीमारी से बचाव पर दी अहम जानकारी

Summary :

PGI Chandigarh Health Seminar: पीजीआई (पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) चंडीगढ़ में आईबीडी (Inflammatory Bowel Disease) डीपी के तहत एक विशेष जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में विशेषज्ञ डॉक्टर उषा दत्ता ने लोगों को छोटी आंत से जुड़ी बीमारियों, उनके कारणों और बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। सेमिनार के बाद डॉक्टर उषा दत्ता ने उपस्थित लोगों से सीधे बातचीत की और उनके सवालों के जवाब देकर उन्हें पूरी तरह संतुष्ट किया। इस दौरान उन्होंने आम जनता को सरल भाषा में बताया कि किस तरह खानपान और दिनचर्या में बदलाव करके पेट…

PGI Chandigarh Health Seminar: पीजीआई (पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) चंडीगढ़ में आईबीडी (Inflammatory Bowel Disease) डीपी के तहत एक विशेष जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में विशेषज्ञ डॉक्टर उषा दत्ता ने लोगों को छोटी आंत से जुड़ी बीमारियों, उनके कारणों और बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।

सेमिनार के बाद डॉक्टर उषा दत्ता ने उपस्थित लोगों से सीधे बातचीत की और उनके सवालों के जवाब देकर उन्हें पूरी तरह संतुष्ट किया। इस दौरान उन्होंने आम जनता को सरल भाषा में बताया कि किस तरह खानपान और दिनचर्या में बदलाव करके पेट और छोटी आंत से जुड़ी गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

सेमिनार को लोगों ने बताया बेहद उपयोगी

PGI Chandigarh Health Seminar
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सेमिनार में मौजूद लोगों ने डॉक्टर उषा दत्ता द्वारा दी गई जानकारी की सराहना की। लोगों का कहना था कि इस प्रकार के कार्यक्रम आज के समय में बेहद जरूरी हैं, क्योंकि बदलती जीवनशैली और खानपान के कारण पेट और आंतों से जुड़ी बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। लोगों ने कहा कि डॉक्टर उषा दत्ता द्वारा दी गई जानकारी मानवीय जीवन के लिए बेहद आवश्यक है और इससे बीमारी की पहचान व उपचार के बारे में सही दिशा मिलती है।

बच्चों और युवाओं को विशेष सलाह

डॉक्टर उषा दत्ता ने खासतौर पर उन बच्चों और युवाओं को लेकर चिंता जताई जो पढ़ाई या नौकरी के चलते पीजी, हॉस्टल या बाहर किराए पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चे अक्सर बाहर का खाना खाते हैं या जल्दी-जल्दी खाना बनाकर खा लेते हैं, जिससे पेट की समस्याएं बढ़ जाती हैं।

जानें पूरी सलाह

  • खाना हमेशा अच्छी तरह उबालकर या पूरी तरह पकाकर ही खाएं।
  • अधपका भोजन खाने से उसमें मौजूद कीटाणु पूरी तरह नहीं मरते, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
  • साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और पानी भी स्वच्छ व सुरक्षित इस्तेमाल करें।
  • डॉक्टर उषा दत्ता ने कहा कि उबालकर या अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाने से भोजन में मौजूद बैक्टीरिया और हानिकारक कीटाणु नष्ट हो जाते हैं, जिससे पेट और छोटी आंत की बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है।

संक्रमण से बचाव ही सबसे बड़ा उपचार

सेमिनार में डॉक्टर उषा दत्ता ने स्पष्ट किया कि पेट और छोटी आंत की बीमारियों में सबसे बड़ा कारण संक्रमण, गलत खानपान और अनहाइजीनिक भोजन होता है। यदि शुरुआत से ही सावधानी बरती जाए तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है।

लोगों से अपील

  • ताजा और साफ भोजन करें
  • खुले में बिकने वाले असुरक्षित खाद्य पदार्थों से बचें
  • हाथ धोने की आदत अपनाएं
  • पेट से संबंधित लक्षणों को नजरअंदाज न करें
  • स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों की जरूरत

जागरूकता कार्यक्रम समाज के लिए फायदेमंद

सेमिनार में मौजूद लोगों ने पीजीआई प्रशासन और आयोजकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समाज के लिए बेहद फायदेमंद हैं। लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी इसी प्रकार के स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि आम जनता को बीमारियों के प्रति जागरूक किया जा सके। सेमिनार का मुख्य संदेश यही रहा कि साफ-सुथरा भोजन, सुरक्षित पानी और सही जीवनशैली अपनाकर छोटी आंत और पेट की बीमारियों से बचाव संभव है।

Pankhil Verma