Mohan Bhagwat Gen Z outreach : जेन जी आंदोलन ने भारत में राजनीति की नई परिभाषा लिख दी है। अब सभी पार्टियां अपनी रणनीतियों में बदलाव करने लगी हैं। चाहे पक्ष हो विपक्ष हो उनके डिस्कोर्स में अब जेन जी और उन्हें खुद से कनेक्ट करने की पहल दिखने लगी है।
जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं तक पहुँच बनाने के लिए इंस्टाग्राम रील का सहारा लिया, वहीं अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी जेन-जी और जेन-अल्फा से जुड़ने की बड़ी योजना बनाई है। संघ प्रमुख मोहन भागवत जल्द ही अपने आने वाले कार्यक्रमों में देशभर के 100 से अधिक शहरों के युवाओं से सीधा वर्चुअल कम्युनिकेट करेंगे।
100 शहरों में जेन जी से कनेक्शन
संघ प्रमुख मोहन भागवत आगामी 6 अगस्त को ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टु यूनाइटेड नेशन्स’ की 15वीं वर्षगांठ पर आयोजित कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे। मुंबई के अंबानी सेंटर से होने वाले इस आयोजन में देश के 100 शहरों से 15 से 19 साल के करीब 2000 से अधिक छात्र वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लेंगे।
आईआईएमयूएन युवाओं द्वारा संचालित एक वैश्विक मंच है, जिससे करीब 7.5 करोड़ युवा जुड़े हुए हैं। संघ का मानना है कि बदलती पीढ़ी की सोच और प्राथमिकताओं को समझने के लिए उनसे लगातार बातचीत बेहद जरूरी है।
जेन जी आन्दोलन ने बदली हवा
भारत में जेन जी आंदोलन सिर्फ शिक्षा के मुद्दे तक सीमित नहीं था। बल्कि इस आन्दोलन ने राजनीतिक बदलाव की भी नीव रखने का काम किया है। नीट पेपर लीक विवाद के बाद उपजे जनआक्रोश के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा था।
जंतर-मंतर की इस घटना के बाद संघ प्रमुख ने स्वीकार किया कि समय के साथ परिवर्तन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और नई पीढ़ी के मन की बात जाने बिना उनसे सफल बातचीत संभव नहीं है। जंतर-मंतर के प्रदर्शन ने यह साफ़ कर दिया है कि नई जनरेशन सवाल पूछने से पीछे नहीं हटने वाली, इसलिए देश की राजनीति और सामाजिक संगठनों को अब उन्हें विश्वास में लेना ही होगा।
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