सड़क दुर्घटनाओं में युवाओं की मृत्यु चिंताजनक: ओम बिरला

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नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। लोकसभा स्पीकर एवं कोटा बूंदी के सांसद ओम बिरला ने बुधवार को संसद भवन स्थित कार्यालय में अपने संसदीय क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक की। सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्था ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ के प्रतिनिधियों के साथ हुई इस बैठक का उद्देश्य कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में ‘जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम’ को प्रभावी ढंग से लागू कर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को न्यूनतम स्तर तक लाना तथा दीर्घकालिक रूप से शून्य मृत्यु दर (जीरो फेटेलिटी) सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करना था। बैठक के…

नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। लोकसभा स्पीकर एवं कोटा बूंदी के सांसद ओम बिरला ने बुधवार को संसद भवन स्थित कार्यालय में अपने संसदीय क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक की। सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्था ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ के प्रतिनिधियों के साथ हुई इस बैठक का उद्देश्य कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में ‘जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम’ को प्रभावी ढंग से लागू कर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु को न्यूनतम स्तर तक लाना तथा दीर्घकालिक रूप से शून्य मृत्यु दर (जीरो फेटेलिटी) सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करना था।

बैठक के दौरान स्पीकर ओम बिरला ने सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क हादसों में सबसे अधिक जानें युवाओं की जाती हैं, जो न केवल परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है बल्कि राष्ट्र की उत्पादक शक्ति का भी नुकसान है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासनिक विषय नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का विषय है और इसे जन आंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना नहीं, बल्कि कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र को एक आदर्श ‘जीरो फेटेलिटी मॉडल’ के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि यदि समन्वित प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में 70 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है और अंततः इसे शून्य के करीब पहुंचाया जा सकता है।

बैठक में ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ द्वारा प्रस्तुत विस्तृत अध्ययन और आंकड़ों पर चर्चा की गई। फाउंडेशन ने बताया कि कोटा-बूंदी क्षेत्र में प्रतिवर्ष औसतन 400 से अधिक लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं के कारण होती है। अध्ययन में ऐसे 21 अति गंभीर सड़क कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं, जहां लगभग 50 प्रतिशत सड़क दुर्घटना जनित मौतें होती हैं।

इसके अतिरिक्त, 19 ऐसे स्थानों की पहचान की गई है, जहां बार-बार ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के कारण लगभग 25 प्रतिशत मौतें होती हैं। वहीं 12 अत्यंत संवेदनशील पैदल यात्री दुर्घटना स्थलों की पहचान की गई है, जहां लगभग 20 प्रतिशत दुर्घटना जनित मौतें दर्ज की गई हैं।

फाउंडेशन ने यह भी बताया कि कोटा-बूंदी क्षेत्र के लगभग 60 पुलिस थाना क्षेत्रों में से 25 थाना क्षेत्र ऐसे हैं, जहां कुल सड़क दुर्घटना मृत्यु का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है। अध्ययन के अनुसार तेज गति और खतरनाक ओवरटेकिंग जैसी लापरवाह ड्राइविंग लगभग 24 प्रतिशत दुर्घटना जनित मौतों का प्रमुख कारण है। बैठक में यह भी बताया गया कि वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में कोटा-बूंदी क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं में कमी दर्ज की गई है, जो सड़क सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता का सकारात्मक संकेत है। हालांकि, इस दिशा में और अधिक व्यापक तथा संस्थागत प्रयासों की आवश्यकता है।

बैठक के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), शहरी स्थानीय निकायों, पुलिस विभाग, परिवहन विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग-अलग कार्ययोजनाओं (एक्शन प्लान) पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें दुर्घटना संभावित स्थलों पर इंजीनियरिंग सुधार, सड़क सुरक्षा ऑडिट, ऑन-साइट निरीक्षण, ट्रैफिक प्रबंधन, संकेतक व्यवस्था, ब्लैक स्पॉट सुधार, पैदल यात्रियों की सुरक्षा तथा स्थानीय स्तर पर संस्थागत साझेदारी को मजबूत करने जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे। राजमार्गों के किनारे स्थित स्कूलों के बच्चों को भी सड़क दुर्घटनाओं से बचाने पर चर्चा हुई।

दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया। बैठक में चर्चा की गई कि दुर्घटना के बाद पीड़ित को अस्पताल तक पहुंचाने में लगने वाले समय को कैसे कम किया जाए, एम्बुलेंस सेवाओं को और अधिक प्रभावी कैसे बनाया जाए तथा ट्रॉमा केयर प्रणाली को किस प्रकार मजबूत किया जाए।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि कोटा में पहले से स्थापित कमांड एवं कंट्रोल सेंटरों का अधिकतम उपयोग कर सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि प्रमुख राजमार्गों और संवेदनशील स्थलों पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो भी वाहन चालक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं, अत्यधिक गति से वाहन चलाते हैं या खतरनाक तरीके से ओवरटेकिंग करते हैं, उनकी तत्काल पहचान कर उन्हें चेतावनी देने और आवश्यक कार्रवाई करने की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। तकनीक आधारित निगरानी सड़क सुरक्षा सुधारने में अत्यंत प्रभावी साबित हो सकती है।

बिरला ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं, विशेषज्ञ संगठनों और आम नागरिकों को भी मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समन्वित प्रयासों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से कोटा-बूंदी को देश का पहला आदर्श ‘जीरो फेटेलिटी संसदीय क्षेत्र’ बनाया जा सकता है।

इस बैठक में सेव लाइफ फाउंडेशन के पदाधिकारियों के साथ लोक सभा अध्यक्ष के ओएसडी राजेश गोयल भी उपस्थित रहे।

–आईएएनएस

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