पटना, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को सियासी हलचल तेज है, क्योंकि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी नई एनडीए सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करना है।
इसके लिए एक विशेष एकदिवसीय सत्र बुलाया गया है, जिसमें फ्लोर टेस्ट कराया जाएगा।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस मुद्दे पर आईएएनएस से कहा कि एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है। उन्होंने कहा, “जब भी नया मुख्यमंत्री शपथ लेता है और नई सरकार बनती है, तो फ्लोर टेस्ट कराना एक सामान्य प्रक्रिया होती है।”
वहीं, बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने भी भरोसा जताते हुए कहा, “आज फ्लोर टेस्ट है। हमें सुबह 11 बजे विधानसभा पहुंचना है। यह लोकतंत्र की खूबसूरती है कि हम सदन में अपनी ताकत दिखाएंगे।”
दरअसल, फ्लोर टेस्ट एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके जरिए यह तय किया जाता है कि सरकार के पास विधानसभा में बहुमत है या नहीं। इसे विश्वास मत या ट्रस्ट वोट भी कहा जाता है।
इस प्रक्रिया में राज्यपाल मुख्यमंत्री को निर्देश देते हैं कि वे सदन में अपना बहुमत साबित करें। इसके लिए अक्सर विशेष सत्र बुलाया जाता है। मतदान की प्रक्रिया अलग-अलग तरीकों से हो सकती है। जैसे ध्वनि मत (वॉइस वोट), इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग या फिर सदस्यों की गिनती के जरिए।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, फ्लोर टेस्ट किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा होता है, क्योंकि इससे सरकार की वैधता स्पष्ट होती है और यह सुनिश्चित होता है कि सत्ता में बैठी सरकार को सदन का समर्थन प्राप्त है।
अब सबकी नजरें आज होने वाले इस फ्लोर टेस्ट पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो जाएगा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार कितनी मजबूत है और क्या वह सदन में अपना बहुमत साबित कर पाती है या नहीं।
–आईएएनएस
वीकेयू/एएस
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