SC on Minor Girl Abortion : आज सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय सुनाया. मामला 15 साल की नाबालिग लड़की के 28 हफ्ते बाद गर्भपात कराने की इजाजत को लेकर था. सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी महिला खासकर नाबालिग को इच्छा के खिलाफ गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.
यह फैसला जस्टिस बी.वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जवल भुइयां की बेंच ने सुनाया. बेंच ने मामले को संवेदनशील बताते हुए कहा कि अगर महिला को जबरन गर्भ जारी रखने के लिए कहा जाए तो उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा और उसकी मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा.
लड़की नहीं रखना चाहती बच्चा
दरअसल, लड़की 10 अप्रैल को दिल्ली एम्स में भारती हुई. मामले को लेकर लड़की मानसिक रोप से परेशान थी और उसने आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी. इससे पहले एक नाबालिग लड़के के साथ सह्मंती से बने सम्बन्ध में वह गर्भवती हो गई थी.
लड़की बच्चे को नहीं रखना चाहती थी जिसके लिए उसने गर्भपात कराने का फैसला लिया था. पहले वह दिल्ली हाईकोर्ट गई,जहां से उसे इजाजत नहीं मिली उसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट गई, जिस पर आज सुनवाई हुई और लड़की को इस मामले में राहत मिली.
इस मामले में सरकार की और से सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी दलील रखीं. उन्होंने कहा कि इस समय लड़की का गर्भपात कराना मां और बच्चे को जोखिम में डाल सकता है. वकील ने कहा कि सरकार बच्चे और मां की देखभाल कर सकती है.
ऐसे मामलों में हार जीत नहीं
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला की इच्छा महत्वपूर्ण है.कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसे मामलों में राहत नहीं दी गई तो महिलाएं मजबूरी में अवैध और खतरनाक तरीकों का सहारा लेंगी.
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, “ऐसे मामलों में कोई जीतता नहीं, हर कोई हारता है.” कोर्ट ने एम्स में गर्भपात प्रक्रिया पूरा होने और मेडिकल सावधानियों को बरते जाने की बात भी कही. वहीँ अभिभावक से सहमति होने पर भी बात कही.
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