सीलमपुर में सजा दिल्ली का पहला कांवड़ शिविर, 24 घंटे भोजन, सुरक्षा और इलाज की व्यवस्था

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नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। सावन के महीने में कांवड़ियों की सेवा के लिए दिल्ली के सीलमपुर में 42 साल पुराना कावड़ शिविर सजाया गया है। यह शिविर कावड़ सेवा समिति, सीलमपुर द्वारा धर्मपुरा रेड लाइट पर लगाया गया है। कावड़ सेवा समिति के सदस्य तीर्थ राम ने बताया कि यह लाला मुरलीधर कावड़ कैंप है और इसे दिल्ली का पहला कावड़ शिविर माना जाता है। इसकी शुरुआत खुद लाला मुरलीधर ने की थी, तभी से हर साल यहां हजारों कांवड़ियों की सेवा की जाती है। शिविर में सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के जवान तैनात हैं। तीर्थ राम के…

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। सावन के महीने में कांवड़ियों की सेवा के लिए दिल्ली के सीलमपुर में 42 साल पुराना कावड़ शिविर सजाया गया है। यह शिविर कावड़ सेवा समिति, सीलमपुर द्वारा धर्मपुरा रेड लाइट पर लगाया गया है।

कावड़ सेवा समिति के सदस्य तीर्थ राम ने बताया कि यह लाला मुरलीधर कावड़ कैंप है और इसे दिल्ली का पहला कावड़ शिविर माना जाता है। इसकी शुरुआत खुद लाला मुरलीधर ने की थी, तभी से हर साल यहां हजारों कांवड़ियों की सेवा की जाती है।

शिविर में सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के जवान तैनात हैं। तीर्थ राम के मुताबिक यहां सीआरपीएफ के जवान भी मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर एसएचओ भी आकर हालात का जायजा लेते रहते हैं।

कांवड़ियों के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। शिविर में डॉक्टरों की टीम, प्राथमिक उपचार और दवाइयों की व्यवस्था है। खाने-पीने की दिक्कत न हो इसलिए 24 घंटे भोजन, चाय-नाश्ते और साफ-सफाई का इंतजाम किया गया है। तीर्थ राम ने कहा कि कांवड़िए पूरी रात चलते हैं, इसलिए उनके आराम और सेवा में कोई कमी नहीं रखी जा रही।

हरिद्वार से 31 जुलाई को यात्रा शुरू करने वाले एक शिव भक्त ने आईएएनएस से कहा, “रास्ते में मैंने कई कावड़ शिविर देखे, लेकिन यहां जैसी मेडिकल सुविधा और इलाज मुझे कहीं नहीं मिला।”

एक अन्य कांवड़िए ने बताया, “यात्रा में मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। सभी जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं।”

कावड़ यात्रा 2026 की शुरुआत 30 जुलाई से हुई थी। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पवित्र सावन महीने के पहले दिन से शुरू होती है और सावन शिवरात्रि पर चरम पर पहुंचती है। इस साल सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को है, इसी दिन भक्त शिवलिंग पर गंगाजल से जलाभिषेक करेंगे।

लाखों शिव भक्त नंगे पांव हरिद्वार, गौमुख या सुल्तानगंज जैसी जगहों से गंगाजल लेकर बांस की कांवड़ में भरकर अपने इलाके के शिव मंदिरों तक पैदल जाते हैं। यात्रा 28 अगस्त को सावन महीने के अंत के साथ पूरी होगी।

–आईएएनएस

वीकेयू/वीसी

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