संजीव भट की याचिका पर विचार करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Summary :

Supreme Court , Sanjeev Bhat, Justice Ajay Rastogi

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने हिरासत में मौत के 30 साल पुराने मामले में 11 अतिरिक्त गवाहों से पूछताछ के लिये भारतीय पुलिस सेवा के बर्खास्त अधिकारी संजीव भट की याचिका पर विचार करने से बुधवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की अवकाश पीठ ने कहा कि तीन न्यायाधीशों की पीठ पहले ही 24 मई को इसी तरह की एक याचिका पर आदेश दे चुकी है और ऐसी स्थिति में वह याचिका पर विचार नहीं कर सकती। गुजरात सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिन्दर सिंह ने पीठ से कहा कि 1989 के हिरासत में मौत के इस मामले में अंतिम बहस पूरी हो चुकी है और निचली अदालत ने कहा है कि इस मामले में 20 जून को फैसला सुनाया जायेगा। 

पश्चिम बंगाल में हड़ताल पर पूरे प्रदेश के सरकारी डॉक्टर, स्वास्थ्य सेवाएं ठप

संजीव भट इस मामले में आरोपी हैं। इस घटना के वक्त वह गुजरात के जामनगर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे। अभियोजन के अनुसार संजीव भट ने सांप्रदायिक दंगे के दौरान एक सौ से अधिक व्यक्तियों को हिरासत में लिया था और इन्हीं में से एक व्यक्ति की रिहाई होने के बाद अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी। संजीव भट को बगैर अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और सरकारी वाहन का दुरूपयोग करने के आरोप में 2011 में निलंबित किया गया था और बाद में अगस्त, 2015 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। 
भट ने गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुये मंगलवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने हिरासत में मौत के मुकदमे की सुनवाई के दौरान पूछताछ के लिये अतिरिक्त गवाहों को बुलाने का संजीव भट का अनुरोध अस्वीकार कर दिया था। गुजरात सरकार ने भट के इस प्रयास को मुकदमे में विलंब करने का हथकंडा करार दिया। राज्य सरकार का कहना था कि 24 मई को एक अन्य पीठ ने निचली अदालत को इस मुकदमे में अब किसी भी आधार पर और विलंब नहीं करने का निर्देश दिया था। 

Desk Team