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BSF का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, जानें- क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (1 दिसंबर) को मौखिक रूप से कहा कि BSF (सीमा सुरक्षा बल) का तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर दूर तक करने के केंद्र सरकार के फैसले से पंजाब पुलिस की शक्तियों पर अतिक्रमण नहीं हुआ है।

HIGHLIGHTS

  • सॉलिसिटर जनरल बोले- गुजरात जैसे राज्यों में BSF का अधिकार क्षेत्र 80 किलोमीटर तक था
  • ‘दोनों पक्ष आपस में विचार-विमर्श करेंगे ताकि अगली तारीख से पहले इन्हें निपटाया जा सके’
  • ‘पंजाब पुलिस से जांच का अधिकार नहीं लिया गया’

चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस जे.बी. पारदीवाला तथा जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने पंजाब सरकार के 2021 के वाद पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। उसने केंद्र की ओर से पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और पंजाब सरकार का पक्ष रख रहे वकील शादान फरासत से साथ में बैठकर उन मुद्दों पर निर्णय संयुक्त रूप से करने को कहा जिन पर पीठ को फैसला करना है। पीठ ने कहा, ‘‘दोनों पक्ष आपस में विचार-विमर्श करेंगे ताकि अगली तारीख से पहले इन्हें निपटाया जा सके।’’ उसने कहा कि पंजाब के महाधिवक्ता इस बैठक में भाग ले सकते हैं।

चीफ जस्टिस ने रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद प्रथम दृष्टया कहा कि ऐसे समवर्ती अधिकार हैं जिनका इस्तेमाल BSF और राज्य पुलिस दोनों कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पंजाब पुलिस से जांच का अधिकार नहीं लिया गया है।’’ सॉलिसिटर जनरल ने एक संक्षिप्त सुनवाई में कहा कि BSF का सभी सीमावर्ती राज्यों में अधिकार क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि गुजरात जैसे राज्यों में BSF का अधिकार क्षेत्र 80 किलोमीटर तक था जो अब सभी सीमावर्ती राज्यों में एक समान 50 किलोमीटर है।

 

 

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