नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेताओं पर हुए हमलों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। एक ओर टीएमसी इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा और अन्य विपक्षी दल इसे जनता के आक्रोश का परिणाम करार दे रहे हैं। अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए हमलों के बाद विभिन्न दलों के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “हिंसा बंगाल में हो रही है, जो एक ऐसा क्षेत्र है जहां देश के सबसे सुरक्षित पदों में गिने जाने वाले सांसद भी सुरक्षित नहीं हैं। वहां भारतीय जनता पार्टी से जुड़े गुंडे आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे माहौल में रहना स्वाभाविक रूप से कठिन है। सांसद का यह कहना बिल्कुल सही था कि आज यह मुद्दा शर्म का विषय बन गया है।”
उन्होंने कहा कि यह अब केवल राष्ट्रीय शर्म की बात नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शर्म का विषय है कि जिस राज्य में सांसद भी असुरक्षित हैं, वहां आम जनता कैसे सुरक्षित रह सकती है? भारतीय जनता पार्टी द्वारा पैदा किया गया आतंक का माहौल इस समय बंगाल में छाया हुआ है। ऐसी सरकार को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
जेडीयू के वरिष्ठ नेता हरि नारायण सिंह ने कहा कि ममता बनर्जी वामपंथी सरकार को हटाकर सत्ता में आई थीं। उन्होंने काफी संघर्ष किया और 15 वर्षों तक शासन किया, लेकिन उनके शासनकाल में जनता के प्रति उनका व्यवहार ठीक नहीं रहा। वहां कोई खुलकर सच नहीं बोल सकता था और निष्पक्ष चुनाव भी नहीं हो रहे थे। वार्ड और पंचायत चुनावों में भी हंगामा होता था। वहां जनता नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन चुनाव लड़ता था। पिछला चुनाव भी टीएमसी ने दमन के जरिए लड़ा था।
उन्होंने कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनाव हुआ और इसका नतीजा यह रहा कि ममता बनर्जी सत्ता से बाहर हो गईं। अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर उन्होंने कहा कि यह कोई पहले से तय की गई घटना नहीं थी, बल्कि उनकी सरकार के दौरान जनता के साथ किए गए व्यवहार का परिणाम था। ऐसा नहीं है कि भाजपा के उकसावे के कारण इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, बल्कि ममता बनर्जी की पार्टी और सरकार के व्यवहार के कारण जनता में नाराजगी पैदा हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति यह है कि बैठक में कुल 80 विधायकों में से महज 20 विधायक ही पहुंचे। सांसदों में भी नाराजगी है और पार्टी में टूट की आशंका बनी हुई है।
भाजपा नेता टी.आर. श्रीनिवास ने पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुई राजनीतिक हिंसा को लेकर कपिल सिब्बल और ममता बनर्जी की आलोचना की। उन्होंने सवाल किया, “जब हजारों भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हुई थी तब आप कहां थे? आर.जी. कर कांड हुआ तो आप कहां थे? संदेशखाली की घटनाएं हुईं तो आप कहां थे? जब ममता बनर्जी हिंसा को बढ़ावा दे रही थीं तब आप कहां थे? क्या आपके मुंह में फेविकोल लगा हुआ था? अब अचानक आप जाग गए हैं। जब लोगों का आक्रोश सामने आ रहा है तो आप भाजपा पर आरोप लगा रहे हैं।”
जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कपिल सिब्बल के बयान पर कहा कि कपिल सिब्बल को कांग्रेस नेताओं के पुराने बयान भी देख लेने चाहिए। टीएमसी के कथित आतंक के माहौल को लेकर कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने चुनाव के दौरान तीखे बयान दिए थे। अब जब सरकार नहीं रही, तो पछताने से क्या फायदा? टीएमसी को हराने में कांग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
उन्होंने कहा कि जिस तरह टीएमसी में इस्तीफे हो रहे हैं और बैठकों में विधायक नहीं पहुंच रहे हैं, उससे साफ है कि पार्टी बड़े टूट की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अगर टीएमसी नेता अपने कार्यों पर आत्ममंथन करें और अपनी गलतियों से सीख लें, तो शायद पार्टी की मुश्किलें कुछ कम हो सकती हैं।
–आईएएनएस
एएमटी/एएस
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