यूसीसी पर बहस तेज : जमीयत उलेमा-ए-हिंद का पुरजोर विरोध, कांग्रेस नेता ने व्यापक चर्चा पर दिया जोर

Summary :

नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बहस तेज होती जा रही है। उत्तर प्रदेश के शामली में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने एक बार फिर यूसीसी का विरोध दोहराते हुए कहा कि यह कानून देश की विविधता और अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। वहीं, मुंबई में कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने यूसीसी विधेयक पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है, लेकिन किसी भी कानून को एकतरफा तरीके से लागू नहीं किया जाना चाहिए।…

नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। देश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बहस तेज होती जा रही है। उत्तर प्रदेश के शामली में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने एक बार फिर यूसीसी का विरोध दोहराते हुए कहा कि यह कानून देश की विविधता और अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

वहीं, मुंबई में कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने यूसीसी विधेयक पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है, लेकिन किसी भी कानून को एकतरफा तरीके से लागू नहीं किया जाना चाहिए।

मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद पहले से ही यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध करती रही है और आगे भी विरोध जारी रहेगा। भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और सामाजिक परंपराओं वाला देश है, इसलिए ऐसा कानून जो सभी पर समान रूप से लागू हो, व्यवहारिक नहीं हो सकता। मुसलमान शरीयत के बिना नहीं रह सकते। अलग-अलग समुदायों की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए और यूसीसी को एकतरफा तरीके से लागू करने का प्रयास उचित नहीं होगा।

वहीं, मुंबई में कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि यदि सरकार यूसीसी विधेयक लाना चाहती है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन पहले विधेयक की पूरी जानकारी लोगों तक पहुंचनी चाहिए और इस पर व्यापक बहस होनी चाहिए। किसी भी महत्वपूर्ण कानून को समाज के विभिन्न वर्गों से चर्चा किए बिना लागू करना उचित नहीं है।

दलवई ने कहा कि महिलाओं को अधिकार मिलना चाहिए और इस दिशा में कानून बनना स्वागत योग्य है। मुस्लिम समाज में भी महिलाओं को आर्थिक लाभ और कुछ कानूनी अधिकार दिए गए हैं। विधेयक में संपत्ति में महिलाओं के अधिकार, गुजारा-भत्ता, इद्दत से जुड़े प्रावधान और अन्य सामाजिक पहलुओं को किस प्रकार शामिल किया गया है, इस पर स्पष्टता जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि बहुविवाह पर रोक लगाने का प्रस्ताव सही दिशा में कदम हो सकता है, लेकिन पूरे विधेयक पर समाज के सभी वर्गों की राय आवश्यक है। व्यापक संवाद और सहमति से बना कानून अधिक प्रभावी और स्वीकार्य होगा।

–आईएएनएस

पीएसके/एबीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.