Unnao Rape Case Hearing in SC: उन्नाव रेप मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा कुलदीप सिंह सेंगर को दी गई जमानत पर तत्काल रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर कुलदीप सेंगर को नोटिस भी जारी किया है।
जमानत पर रोक लगाने का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत आदेश के खिलाफ सीबीआई की ओर से दायर याचिका पर सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान चीफ जस्टिस ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि आमतौर पर यह नियम होता है कि अगर कोई व्यक्ति जेल से बाहर आ चुका है, तो कोर्ट उसकी आजादी नहीं छीनती, लेकिन इस मामले में स्थिति अलग है, क्योंकि कुलदीप सेंगर अभी एक अन्य मामले में जेल में बंद है। इसी आधार पर कोर्ट ने जमानत पर रोक लगाने का आदेश दिया।
सेंगर को नोटिस जारी

2017 के उन्नाव रेप केस में एक नाबालिग लड़की के साथ रेप के मामले में बीजेपी से निकाले गए नेता कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को सस्पेंड कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की अपील पर सेंगर को नोटिस भी जारी किया है।
Unnao Rape Case Hearing Live Updates: CBI की ओर से SG ने पेश कीं दलीलें

सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत में दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह मामला एक नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म का है। सेंगर पर धारा 376 और पोक्सो एक्ट की धारा 5 और 6 के तहत आरोप तय किए गए थे। ट्रायल कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए एसजी तुषार मेहता ने बताया कि कोर्ट ने सेंगर को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ट्रायल कोर्ट ने यह भी स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड किया था कि पीड़िता की उम्र 16 साल से कम, यानी 15 साल 10 महीने थी। इस सजा के खिलाफ सेंगर की अपील फिलहाल हाईकोर्ट में लंबित है।
एसजी ने कहा कि धारा 375 के तहत सेंगर को दोषी ठहराया गया है और अगर अपराध किसी प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा किया गया हो, तो उसमें न्यूनतम सजा 20 साल या उम्रकैद तक हो सकती है। उन्होंने यह भी दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने इस तथ्य को नजरअंदाज किया कि धारा 376 के जिन प्रावधानों के तहत सेंगर दोषी पाए गए, उनमें भी उम्रकैद की सजा का प्रावधान है।
Kuldeep Sengar Case: हाईकोर्ट के निष्कर्ष को बताया गलत
तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के उस निष्कर्ष को भी गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि विधायक पोक्सो एक्ट की धारा 5 के तहत ‘पब्लिक सर्वेंट’ की श्रेणी में नहीं आता। उन्होंने साफ कहा कि जब पीड़ित नाबालिग हो, तो यह मायने नहीं रखता कि अपराधी सार्वजनिक पद पर है या नहीं। वहीं, कुलदीप सेंगर की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे और हरिहरन ने बचाव पक्ष की दलीलें पेश कीं। बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रोक लगा दी है।
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