वैशाख कृष्ण प्रतिपदा पर भस्म आरती का दिव्य श्रृंगार, जयकारों से गूंजा मंदिर

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उज्जैन, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह की भस्म आरती के समय मंदिर का नजारा बेहद आकर्षक और भावुक करने वाला था। देश-विदेश से आए श्रद्धालु बाबा के दर पर देर रात से लाइन पर लगकर अपने अराध्य के दर्शन मात्र पाने के लिए इंतजार कर रहे थे। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठा। सुबह की भस्म आरती सबसे खास मानी जाती है। इसमें बाबा पर चढ़ने वाली भस्म कपिला गाय के…

उज्जैन, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह की भस्म आरती के समय मंदिर का नजारा बेहद आकर्षक और भावुक करने वाला था।

देश-विदेश से आए श्रद्धालु बाबा के दर पर देर रात से लाइन पर लगकर अपने अराध्य के दर्शन मात्र पाने के लिए इंतजार कर रहे थे। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठा।

सुबह की भस्म आरती सबसे खास मानी जाती है। इसमें बाबा पर चढ़ने वाली भस्म कपिला गाय के कंडों की राख, पलाश, बड़, पीपल और बेर की लकड़ियों को जलाकर विशेष रूप से तैयार की जाती है। आरती के दौरान शिवलिंग पर लगभग ढाई किलो भस्म चढ़ाई जाती है, जिससे बाबा महाकाल को जगाने की परंपरा पूरी की जाती है।

नियमानुसार सुबह की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सबसे पहले बाबा के पट खोले गए और ब्रह्म मुहूर्त में महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा पहले बाबा का जलाभिषेक किया गया और बाद में पंचामृत से स्नान करवाया गया। इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इसमें महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं, जिसमें वे सिर्फ भस्म से स्नान करते हैं।

इसके बाद महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। इसमें बाबा के माथे पर मुकुट धारण कराया गया और चांदी का सुंदर त्रिपुंड लगाया गया। साथ ही, उनके माथे पर त्रिशूल के आकार का सुज्जित किया गया, फिर फूलों की मालाएं, बेलपत्र, चंदन और अन्य पूजा सामग्री से बाबा को सजाया गया।

महाकाल के श्रृंगार के बाद कपूर की आरती की गई और उसके बाद उन्हें भोग लगाया गया। बाबा के इस रूप को साकार स्वरूप माना जाता है।

–आईएएनएस

एनएस/पीएम

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