चंडीगढ़, 1 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने पंजाब सरकार पर केंद्र की ‘वीबी-जी राम जी’ योजना को लेकर यूटर्न लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस योजना का कुछ महीने पहले पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में कड़ा विरोध किया गया था, वही योजना अब 1 जुलाई 2026 से राज्य में लागू कर दी गई है। भाजपा ने इसे आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के बदले रुख का प्रमाण बताते हुए सवाल उठाए हैं।
प्रेम शुक्ला ने बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पंजाब की भगवंत मान सरकार ने केंद्र की ‘वीबी-जी राम जी’ योजना लागू करने का फैसला किया है। उन्होंने दावा किया कि 30 दिसंबर 2025 को पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में इसी योजना को गरीब, किसान, दलित और मजदूर विरोधी बताया गया था। उनके अनुसार, उस समय आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने विधानसभा में इस योजना के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार की आलोचना की थी।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अब छह महीने बाद वही सरकार इस योजना को लागू कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर ऐसा क्या बदल गया कि जिस योजना को पहले जनविरोधी बताया जा रहा था, अब उसे ग्रामीण विकास और रोजगार का माध्यम बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को जनता के सामने इस बदलाव का कारण स्पष्ट करना चाहिए।
प्रेम शुक्ला ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों में संभावित हार को देखते हुए पंजाब सरकार अब केंद्र की योजनाओं को स्वीकार करने के लिए मजबूर हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले राजनीतिक कारणों से योजना का विरोध कर रही थी, लेकिन अब आर्थिक परिस्थितियों और जनहित को देखते हुए उसे लागू करना पड़ा है।
उन्होंने दावा किया कि इस योजना पर पंजाब में हर साल लगभग 1,200 से 1,300 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से लगभग 750 से 800 करोड़ रुपए का योगदान होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पंजाब के विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार द्वारा जारी नए परिपत्र में स्वयं स्वीकार किया गया है कि ‘वीबी-जी राम जी’ योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना, आजीविका के अवसरों को मजबूत करना, विकास कार्यों में तेजी लाना और ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन को आगे बढ़ाना है। सरकार को यह बताना चाहिए कि जब योजना के उद्देश्य वही हैं, तो पहले उसका विरोध क्यों किया गया और अब उसे लागू करने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया।
–आईएएनएस
एससीएच/एबीएम
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