15 मिनट में लद्दाख! Zojila Tunnel के दोनों छोर जुड़े, दुनिया की सबसे लंबी सिंगल ट्यूब टनल ने रचा इतिहास

Summary :

Zojila Tunnel Breakthrough : जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को हर मौसम में आपस में जोड़े रखने की दिशा में मंगलवार को एक बड़ी कामयाबी मिली है। सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘जोजिला टनल’ की खुदाई का काम आखिरकार पूरा हो गया है। सुरंग के बीच बचे आखिरी 2.5 मीटर के हिस्से को एक नियंत्रित ब्लास्ट (विस्फोट) के जरिए हटा दिया गया, जिसके साथ ही टनल के दोनों छोर अब आपस में मिल गए हैं। Kashmir Ladakh Connectivity Project : सवा 13 किलीमीटर लम्बी टनल करीब 13.15 किलोमीटर लंबी यह सुरंग दुनिया की सबसे लंबी ‘सिंगल-ट्यूब टू-वे टनल’ (एक ही सुरंग से…

Zojila Tunnel Breakthrough : जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को हर मौसम में आपस में जोड़े रखने की दिशा में मंगलवार को एक बड़ी कामयाबी मिली है। सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘जोजिला टनल’ की खुदाई का काम आखिरकार पूरा हो गया है। सुरंग के बीच बचे आखिरी 2.5 मीटर के हिस्से को एक नियंत्रित ब्लास्ट (विस्फोट) के जरिए हटा दिया गया, जिसके साथ ही टनल के दोनों छोर अब आपस में मिल गए हैं।

Kashmir Ladakh Connectivity Project : सवा 13 किलीमीटर लम्बी टनल

Zojila Tunnel Construction Update
source : social media

करीब 13.15 किलोमीटर लंबी यह सुरंग दुनिया की सबसे लंबी ‘सिंगल-ट्यूब टू-वे टनल’ (एक ही सुरंग से दोनों तरफ ट्रैफिक चलने वाली) सड़क सुरंग है। इस टनल के बन जाने से कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच साल के 12 महीने वाहनों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रह सकेगी।

प्रशासनिक योजना के मुताबिक, इस सुरंग को फरवरी 2028 तक पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा। यह टनल मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में स्थित बालटाल को लद्दाख के द्रास जिले के मिनीमार्ग से जोड़ने का काम करेगी। टनल के मुख्य हिस्से के साथ-साथ करीब 18 किलोमीटर लंबी एक एप्रोच रोड का निर्माण भी समानांतर रूप से चल रहा है।

Zojila Tunnel Construction Update : सफर अब महज 15 मिनट में

अभी तक सर्दियों के दिनों में भारी बर्फबारी और एवलांच (बर्फ खिसकने) के खतरे के चलते जोजिला पास महीनों तक बंद रहता था, जिससे लद्दाख का संपर्क बाकी देश से पूरी तरह कट जाता था। सामान्य दिनों में भी इस खतरनाक हिस्से को पार करने में वाहनों को कम से कम 1 से 1.5 घंटे का समय लग जाता था, लेकिन टनल चालू होने के बाद यह दूरी सिर्फ 15 मिनट में सुरक्षित तय की जा सकेगी।

समुद्र तल से करीब 11,578 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर बनाई जा रही इस महत्वकांक्षी परियोजना की कुल लागत लगभग ₹6,500 करोड़ है। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस टनल परियोजना का करीब 80 फीसदी काम मुकम्मल हो चुका है। यह सुरंग 9.5 मीटर चौड़ी और 7.57 मीटर ऊंची है।

दरअसल, यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 31 किलोमीटर लंबा है, जिसमें सोनमर्ग से मिनीमार्ग तक की एप्रोच रोड और पुल भी शामिल हैं। इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के निर्माण का जिम्मा ‘मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड’ (MEIL) संभाल रही है।

तय समय से 6 महीने पहले पूरा हुआ काम

MEIL ने यह प्रोजेक्ट ‘नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन’ (NHIDCL) के जरिए हासिल किया था और अक्टूबर 2020 में इस पर ग्राउंड वर्क शुरू हुआ था। NHIDCL के अधिकारियों ने बताया कि तमाम कड़े भौगोलिक गतिरोधों के बावजूद टनल की खुदाई का काम तय समय-सीमा से करीब छह महीने पहले ही पूरा कर लिया गया है।

India Infrastructure Engineering Achievement : भारत के लिहाज से बड़ी उपलब्धि

निर्माण कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि इस सुरंग को बनाने के लिए बेहद एडवांस्ड ‘न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग Method’ (NATM) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। दुर्गम पहाड़ी और पथरीले इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से इसे भारत की सबसे बड़ी और अहम इंजीनियरिंग उपलब्धियों में गिना जा रहा है।

यह काम कितना मुश्किल था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान इस निर्माण स्थल पर बर्फ खिसकने की पांच बड़ी घटनाएं दर्ज की गईं। इसमें जनवरी 2023 की वह भीषण घटना भी शामिल है, जब बर्फीले तूफान के बीच भारतीय सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर वहां फंसे 172 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला था।

Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।