Gulzar Poetry: गुलज़ार जी की कलम से 8 खूबसूरत शेर

Summary :

Gulzar Poetry: गुलज़ार जी के 8 बेहतरीन शेर जो दिल को छू जाते हैं

आंखों से आंसुओं के मरासिम पुराने हैं
मेहमां ये घर में आएं तो चुभता नहीं धुआं

यूं भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता

आप के बाद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई

तुम्हारी ख़ुश्क सी आंखें भली नहीं लगतीं
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएं, भेजी हैं

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते

ज़मीं सा दूसरा कोई सख़ी कहां होगा
ज़रा सा बीज उठा ले तो पेड़ देती है

खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं
हवा चले न चले दिन पलटते रहते है

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Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।