“फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं…” पढ़िए Anwar Shaoor के खूबसूरत शेर

Summary :

Anwar Shaoor Poetry: कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तन्हा, लौट कर न देखूँगा चल पड़ा…

इस तअल्लुक़ में नहीं मुमकिन तलाक़

ये मोहब्बत है कोई शादी नहीं

कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तन्हा

लौट कर न देखूँगा चल पड़ा अगर तन्हा

ज़िंदगी की ज़रूरतों का यहाँ

हसरतों में शुमार होता है

फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था

वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था

लगी रहती है अश्कों की झड़ी गर्मी हो सर्दी हो

नहीं रुकती कभी बरसात जब से तुम नहीं आए

हमेशा हाथों में होते हैं फूल उन के लिए

किसी को भेज के मंगवाने थोड़ी होते हैं

सभी ज़िंदगी के मज़े लूटते हैं

न आया हमें ये हुनर ज़िंदगी भर

किया बादलों में सफ़र ज़िंदगी भर

ज़मीं पर बनाया न घर ज़िंदगी भर

हैं पत्थरों की ज़द पे तुम्हारी गली में हम

क्या आए थे यहाँ इसी बरसात के लिए

वो मुझ से रूठ न जाती तो और क्या करती

मिरी ख़ताएँ मिरी लग़्ज़िशें ही ऐसी थीं

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।