“मैं शून्य पे सवार हूँ…” शायरी के शौकीन जरुर पढ़ें Zakir Khan की ये शायरियां

Summary :

कामयाबी हमने तेरे लिए खुद को यूँ तैयार कर लिया, मैंने हर जज़्बात बाज़ार में रख कर इश्तेहार कर लिया..

कामयाबी हमने तेरे लिए खुद को यूँ तैयार कर लिया,

मैंने हर जज़्बात बाज़ार में रख कर इश्तेहार कर लिया..

मैं शून्य पे सवार हूँ

बेअदब सा मैं खुमार हूँ

अब मुश्किलों से क्या डरूं

मैं खुद कहर हज़ार हूँ

हम दोनों में बस इतना सा फर्क है,

उसके सब “लेकिन” मेरे नाम से शुरू होते है

और मेरे सारे “काश” उस पर आ कर रुकते है..

हम दोनों में बस इतना सा फर्क है,

उसके सब “लेकिन” मेरे नाम से शुरू होते है

और मेरे सारे “काश” उस पर आ कर रुकते है…

बे वजह बेवफाओं को याद किया है,

ग़लत लोगों पे बहुत वक़्त बर्बाद किया है

दिलों की बात करता है ज़माना,

पर आज भी मोहब्बत चेहरे से ही शुरू होती हैं

मेरे दो चार ख्वाब हैं,

जिन्हें में आसमां से दूर चाहता हूं..

चाहे जिंदगी गुमनाम रहे,

मौत मैं मशहूर चाहता हूं..

मेरे इश्क़ से मिली है तेरे हुस्न को ये शोहरत,

तेरा ज़िक्र ही कहां था, मेरी दास्तान से पहले

हर एक दस्तूर से बेवफाई मैंने शिद्दत से हैं निभाई

रास्ते भी खुद हैं ढूंढे और मंजिल भी खुद बनाई

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।