केंद्र ने शुक्रवार को कहा कि वह नगा शांति प्रकिया को बगैर विलंब किये पूरा करने के लिये प्रतिबद्ध है और बंदूक के साये में अंतहीन वार्ता स्वीकार्य नहीं है।
नगा वार्ता के लिये सरकार के वार्ताकार एवं नगालैंड के राज्यपाल आर एन रवि ने एक बयान में कहा कि सभी मुद्दों सहित एक परस्पर सहमति वाला व्यापक हल अंतिम समझौते को रूप देने के लिये तैयार है।
बयान में कहा गया है कि दुर्भाग्य से ऐसे मौके पर एनएससीएन-आईएम ने समझौते में देरी करने का रवैया अपनाया है। उसने अलग नगा राष्ट्र ध्वज और संविधान के विवादास्पद मुद्दे उठाये हैं जबकि वह भारत सरकार के रुख से बखूबी अवगत है।
एनएससीएन-आईएम के महासचिव थुइंगलेंग मुइवा और रवि द्वारा 3 अगस्त 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में एक रूपरेखा के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
समझौता 18 साल तक 80 दौर की वार्ताओं के बाद तैयार हुआ था। इसमें बड़ी कामयाबी 1997 में मिली जब नगालैंड में दशकों तक चले उग्रवाद के बाद संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किये गए। नगालैंड में 1947 में भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद उग्रवाद शुरू हो गया था।
बयान में कहा गया है, ‘नगा लोगों की इच्छाओं का सम्मान करते हुए, भारत सरकार बिना किसी देरी के शांति प्रक्रिया का समापन करने के लिए प्रतिबद्ध है। बंदूकों के साए में अंतहीन बातचीत स्वीकार्य नहीं है।’


Download Android App
Download iOS App



