भोपाल : मध्यप्रदेश की 15वीं विधानसभा के पहले सत्र के तीसरे दिन बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी सहित 14 दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देते हुए विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने कहा कि मुझे अत्यंत दुख हो रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का पिछले साल 16 अगस्त को एवं सोमनाथ चटर्जी का निधन 13 अगस्त को हो गया। उन्होंने कहा कि अटलजी के निधन से देश ने एक स्वतंत्रता सेनानी, कुशल प्रशासक तथा प्रख्यात कवि एवं वक्ता खो दिया है।
वहीं, सोमनाथ के निधन से देश के वरिष्ठ एवं कर्मठ राजनेता खो दिया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अटलजी को याद करते हुए कहा, ‘‘उन्हें मैंने सांसद, मंत्री एवं प्रधानमंत्री सहित कई रूप में देखा है। वह नेता ही नहीं बल्कि ऐसे समाज सेवक थे जिनको देश का हर वर्ग प्रेम करता था। मुझे यह कहने में संकोच नहीं है, बल्कि यह सच्चाई है। उनमें बहुत बड़प्पन था।
अटल जी राजनीति क्षेत्र के एक उदाहरण थे जिन्होंने अपने देश की राजनीति को एक नई दिशा दी।’’ वहीं, सोमनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘ मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। वह लोकसभा के सख्त स्पीकर थे। उनके स्पीकर रहते सब (सांसद) अनुशासन में रहे। उनके कार्यकाल में सबसे शांतिपूर्ण लोकसभा रही।’’ मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा,‘‘ अटलजी ऐसे व्यक्तित्व थे, जो पूर्व में न हुआ होगा और न होगा। वह बहुआयामी व्यक्तित्व के थे। उनसे हमें बहुत कुछ सीखने को मिला है। वहीं, सोमनाथ चटर्जी को याद करते हुए भार्गव ने कहा कि उन्होंने संसदीय ज्ञान की एक छाप छोड़ी है।
वहीं, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अटलजी एक कुशल प्रशासक थे। वह भाजपा को शून्य से शिखर तक ले जाने वाले नेता थे। वह मौलिक चिंतक, राजनीति विचारक, कवि, लेखक व वक्ता थे। ऐसा उदाहरण दुनिया में नहीं है।’’
अटल एवं चटर्जी के अलावा सदन ने दिवंगत नेताओं पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रफुल्ल माहेश्वरी एवं मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व सदस्यों इन्द्रजीत कुमार, देवीसिंह पटेल, रामानंद सिंह, दयाल सिंह, जुगल किशोर बजाज, स्वामी प्रसाद लोधी, प्रभुनारायण त्रिपाठी, विमल कुमार चौरडिया, आनंद कुमार श्रीवास्तव, राधाकृष्ण भगत एवं कल्पना परूलेकर को भी श्रद्धांजलि दी गई। दिवंगत नेताओं के सम्मान में सदन में दो मिनट का मौन रखा गया। इसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।


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