आंध्र प्रदेश ने 2019 में वाई एस जगन मोहन रेड्डी की जीत देखी और एन चंद्रबाबू नायडू के हाथों से राज्य की सत्ता जाने का गवाह बना। आंध्र प्रदेश के पांच साल के इतिहास में इससे बड़ा कुछ नहीं हुआ था। 2019 में राज्य में उथलपुथल का माहौल रहा। चुनावी रण से शुरुआत होने, उसके बाद सत्ता में एक नई पार्टी के आने और कई विवादित नीतियों की वजह से राज्य चर्चाओं में रहा।
सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) द्वारा ‘तीन राजधानियां बनाने’ के विचार ने राजधानी के विवाद को बनाए रखा। इस मुद्दे पर किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच, राज्य के वित्तीय दिवालियेपन ने भी सरकार की चिंताएं बढ़ा दीं।
आंध्र प्रदेश में इस साल एक बड़ा नाव हादसा हुआ। 15 सितंबर को 77 पर्यटकों को ले जा रही एक नाव गोदावरी नदी में डूब गई जिससे 51 पर्यटकों की मौत हो गई।
वाईएसआर कांग्रेस को विधानसभा चुनावों में बड़ी सफलता मिली। उसे आंध्र प्रदेश विधानसभा की 175 सीटों में से 151 और लोकसभा की 25 में से 22 सीट पर जीत हासिल हुई। तेलगु देशम पार्टी (तेदेपा) को करारी हार का सामना करना पड़ा। उसे विधानसभा चुनाव में 23 सीटें और लोकसभा चुनाव में तीन सीटें ही मिल सकीं।
वाईएसआर कांग्रेस सरकार ने पुरानी सरकार की कई परियोजनाओं पर रोक लगा दी। राज्य सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री की, अमरावती को नई राजधानी बनाने की योजना रद्द कर दी गई है।
साल का आखिरी आते आते जगन मोहन रेड्डी ने राज्य में तीन राजधानियां बनाने का विचार पेश किया। इनमें से एक कार्यपालिका के लिए, दूसरी न्यायपालिका के लिए और तीसरी विधायिका के लिए होगी। बहरहाल, उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने इस विचार को लेकर गहरी असहमति जाहिर की। आंध्रप्रदेश के रहने वाले नायडू का मानना है कि प्रशासन केंद्रीकृत और विकास विकेंद्रीकृत होना चाहिए।


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