पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में हुई हिंसा के बाद राज्य के सभी विपक्ष दल सत्ता रूढ़ टीएमसी पर हमलावर है। पंचायत चुनाव की तारीख घोषित होते ही सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे जुबानी जंग तो स्वाभिक थी लेकिन पंचायत चुनाव में बड़ा मोड़ उस समय आया जब नामांकन के दौरान दो पक्षों में हिंसा हो गई। ये हिंसा की महज शुरुआत थी ,हिंसा का रूप इतना बढ़ा की केंद्रीय बल की तैनाती की गई। हालात थोड़े नियंत्रित हुए ,तो मतदान भी कराये गए लेकिन मतगणना के दिन भी हिंसा लोकतंत्र के लिए दुखदायी है।
चार सदस्यीय तथ्यान्वेषी समिति का गठन
भारतीय जनता पार्टी के सांसद रविशंकर प्रसाद बुधवार को ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान भड़की हिंसा की जांच के लिए पार्टी द्वारा गठित तथ्यान्वेषी टीम के साथ कोलकाता पहुंचे। प्रसाद ने कहा, “हम हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे और पीड़ितों से मिलेंगे और उसके बाद हम अपनी रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को सौंपेंगे। राज्य में पंचायत चुनाव के दौरान व्यापक हिंसा के मद्देनजर भाजपा ने मंगलवार को चार सदस्यीय तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया।
हिंसा प्रभावित क्षेत्रो का दौरा करेंगे
इससे पहले आज, सांसद प्रसाद ने कहा, ग्राम पंचायत चुनाव में 40 से अधिक लोगों को अपनी जान क्यों गंवानी चाहिए? नरेंद्र मोदी के खिलाफ गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे तथाकथित सहयोगी स्पष्ट चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? मुझे उम्मीद है कि ममता सरकार हमें प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की अनुमति देगी? पश्चिम बंगाल में ग्राम पंचायत चुनाव से पहले हिंसा भड़क उठी, जो पहले 8 जुलाई को होनी थी। हालाँकि, मतदान का दिन व्यापक हिंसा, मतपत्रों की लूट और धांधली की भेंट चढ़ गया।
राज्य चुनाव आयोग ने 10 जुलाई को पंचायत चुनाव के लिए दोबारा मतदान कराया
मुर्शिदाबाद, कूच बिहार, मालदा, दक्षिण 24 परगना, उत्तरी दिनाजपुर और नादिया जैसे कई जिलों से बूथ कैप्चरिंग, मतपेटियों को नुकसान पहुंचाने और पीठासीन अधिकारियों पर हमले की खबरें आईं। मतपेटियों में आग लगाने और झड़पों की भी खबरें सामने आईं। परिणामस्वरूप, राज्य चुनाव आयोग ने 10 जुलाई को पंचायत चुनाव के पुनर्मतदान की घोषणा की। इसलिए, यह सोमवार को संपन्न हुआ और मतगणना मंगलवार, 11 जुलाई को की गई।


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