असम-मिजोरम सीमा विवाद को लेकर हुई हिंसा के बाद ये मुद्दा बढ़ता ही जा रहा है। दोनों राज्यों की पुलिस द्वारा एक दूसरे के अफसरों को समन जारी करने के बाद मिजोरम पुलिस ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। कोलासिब में दर्ज इस एफआईआर को असम सरकार के एक मंत्री ने बचपना करार दिया है।
मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज़ होने पर असम सरकार में मंत्री अशोक सिंघल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बचपना है, नासमझी है, नादानी है… मिज़ोरम की सरकार से आग्रह है कि भारत के संविधान के अंदर रहकर काम करें। उन्होंने कहा, हमें बातचीत से समाधान निकालना चाहिए। बंदूक से समाधान नहीं निकलेगा, FIR से समाधान नहीं निकलेगा। इससे आगे बातचीत का रास्ता बंद हो जाएगा, इससे 2 राज्यों के बीच रिश्ते ख़राब होंगे।
दरअसल, मिजोरम पुलिस ने असम के सीएम के खिलाफ 26 जुलाई को हुई झड़प को लेकर हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश के आरोप में मामला दर्ज किया है। हिमंता बिस्वा सरमा के अलावा मिजोरम पुलिस ने असम के चार पुलिस अफसरों और 2 नौकरशाहों के नाम भी एफआईआर में शामिल किए हैं। इसके अलावा 200 अज्ञात पुलिसकर्मियों के नाम भी मामला दर्ज किया गया है।
मिजोरम पुलिस ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि हथियारों से लैस 200 पुलिसकर्मियों ने आईजीपी के नेतृत्व में उनके 20 पुलिस अफसरों पर हमला किया और उनके पुलिस कैंप को आरक्षित वन की जमीन पर अतिक्रमण बताते हुए जबरदस्ती कब्जाने का प्रयास किया।
गौरतलब है कि असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद के अचानक बढ़ने के दौरान हुई हिंसक झड़प में असम पुलिस के पांच जवानों के साथ कुल लोगों की मौत हो गई और एक पुलिस अधीक्षक समेत 60 अन्य घायल हो गए। सीमा विवाद पर असम सीएम का कहना है कि ये विवाद भूमि को लेकर नहीं है, बल्कि मुद्दा आरक्षित वनों का अतिक्रमण है। वन क्षेत्रों में हमारी कोई बस्तियां नहीं हैं और अगर मिजोरम सबूत दे सकता है, तो हम तुरंत बाहर निकल जाएंगे।


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