उत्तराखंड में डेंगू का प्रकोप फैलने की जनधारणा के विपरीत प्रदेश सरकार ने मंगलवार को बताया कि प्रदेश में इस साल डेंगू से केवल आठ व्यक्तियों की मृत्यु हुई। राज्य विधानसभा में एक प्रश्न के उत्तर में संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने बताया कि आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में डेंगू से आठ लोगों के मरने की सूचना है।
उन्होंने बताया कि इनमें से देहरादून जिले में डेंगू से सर्वाधिक छह मौतें हुईं जबकि दो अन्य की मृत्यु नैनीताल जिले में हुई है। हरिद्वार जिले के भगवानपुर की कांग्रेस विधायक ममता राकेश द्वारा पूछे गये सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि भगवानपुर में डेंगू से 32 मौतें होने की बात कही गयी लेकिन डेथ ऑडिट में एक भी मौत का कारण डेंगू होना नहीं पाया गया।
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश ने मंत्री द्वारा दिये आंकडों को सदन को गुमराह करने वाला बताया और कहा कि प्रदेश में डेंगू से अनेक मौतें हुई हैं और बहुत से मृतकों के घर वह स्वयं संवेदना व्यक्त करने गयी थीं। उन्होंने कहा, ‘‘मंत्री और सरकार सदन को गुमराह कर रहे हैं। डेंगू जैसे विषय को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
नौकरशाही पर सरकार का नियंत्रण नहीं है।’’ इंदिरा ने कहा कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय भी इस मामले पर राज्य सरकार को जवाब तलब कर चुका है और डेंगू से निपटने के लिये कुछ न करने पर उसके खिलाफ तल्ख टिप्पणी भी कर चुका है। हालांकि, कौशिक डेंगू से आठ मौतें होने की अपनी बात पर कायम रहे जिस पर इंदिरा ने कहा कि सदन को गलत आंकडे देकर गुमराह करने के लिए वह जल्द ही विशेषाधिकार हनन का नोटिस देंगी।


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